भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत पूर्व वर्षों से लंबित भुगतानों को लेकर सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधीन परिषद ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा नरेगा सॉफ्ट में आवश्यक तकनीकी प्रावधान उपलब्ध करा दिए गए हैं, जिससे अब IFMIS (Integrated Financial Management Information System) एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली के माध्यम से नियमानुसार कटौती सहित भुगतान किया जा सकेगा।
परिषद द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि SNA-SPARSH के अंतर्गत IFMIS प्रणाली में पहले TDS कटौती का प्रावधान उपलब्ध नहीं होने के कारण वित्तीय वर्ष 2024-25 में आवंटित सामग्री मद की लंबित राशि का भुगतान प्रभावित हुआ था। इस कारण उक्त राशि को वित्तीय वर्ष 2025-26 में व्यय किए जाने का उल्लेख किया गया था। अब तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद जिला स्तर पर लंबित देयकों के लिए FTO बनाए जा सकेंगे।
निर्देशों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 से संबंधित समस्त लंबित देयकों का भुगतान पहले सुनिश्चित किया जाएगा। इसके पश्चात वित्तीय वर्ष 2025-26 में सामग्री मद के अंतर्गत ‘एक बगिया मां के नाम’ और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से जुड़े लंबित भुगतानों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। शेष देयकों का निपटारा FIFO पद्धति से नियमानुसार कटौतियां करते हुए शीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि समस्त जिलों के कलेक्टरों एवं जिला कार्यक्रम समन्वयकों को सूचना हेतु और सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी गई है।




