Corruption News : पुराने कुएं को नया दर्शाकर 2 लाख का भुगतान! कोकोमेटा पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग का आरोप…

Rathore Ramshay Mardan
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सरपंच-सचिव और उपयंत्री की मिलीभगत के आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और राशि वसूली की उठाई मांग

डिंडौरी। ग्रामीण विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन यदि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएं और पुराने निर्माण को नया बताकर सरकारी राशि का भुगतान किया जाए, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि ताजा मामला ग्राम पंचायत कोकोमेटा सामने आया है।

ये रहा पूरा मामला 

दरअसल जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोकोमेटा में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग का किया गया है। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच, सचिव एवं संबंधित उपयंत्री पर मिलीभगत कर पुराने कुएं को नया निर्माण दर्शाते हुए लगभग दो लाख रुपये का भुगतान करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में रतिराम के खेत के पास पेयजल कूप निर्माण के नाम पर करीब दो लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया। आरोप है कि जिस कुएं को नया निर्माण दर्शाकर भुगतान किया गया, वह कई वर्षों से पहले से मौजूद है। इसके बावजूद उसे नया कार्य दर्शाकर सरकारी राशि जारी कर दी गई।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बिना वास्तविक भौतिक सत्यापन और तकनीकी मूल्यांकन के ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई सार्वजनिक धनराशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत समनापुर से मांग की है कि निर्माण स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए तथा माप पुस्तिका (एमबी), मूल्यांकन प्रतिवेदन, भुगतान अभिलेख एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित सरपंच, सचिव, उपयंत्री एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की वसूली की जाए।

 

फिलहाल इस मामले में पंचायत प्रतिनिधियों या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना वास्तविक जांच और तकनीकी मूल्यांकन के भुगतान हुआ है, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?

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