भोपाल। जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ रहे तत्कालीन सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उनके द्वारा किए गए 61 स्थानांतरणों सहित कई प्रशासनिक फैसलों पर गंभीर सवाल उठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश दिए हैं।
जारी आदेश के अनुसार, संतोष शुक्ला के कार्यकाल के दौरान नियम विरुद्ध तरीके से कर्मचारियों के ट्रांसफर और संलग्नीकरण, स्थायी नियुक्तियों में अनियमितता, छात्रावासों के लिए सामग्री खरीदी में गड़बड़ी, बस्ती विकास योजना में बिना अनुमति कार्य स्वीकृति तथा विभिन्न योजनाओं में प्रक्रिया उल्लंघन जैसी कई शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा मरम्मत कार्यों में लागत से अधिक भुगतान किए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।
प्रभारी सहायक आयुक्त ने संतोष शुक्ला द्वारा जल्दबाजी में किए गए सभी ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, डिंडौरी जिले में पदस्थ रहने के दौरान भी संतोष शुक्ला पर स्मार्ट क्लास प्रोजेक्ट, सामग्री खरीदी और निर्माण/मरम्मत कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन उस समय मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
अब सेवानिवृत्ति के दौरान सामने आए नए तथ्यों ने इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह मामला जनजाति कार्य मंत्री विजय शाह के गृह जिले खंडवा से जुड़ा होने के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति में डिप्टी कलेक्टर सृष्टि देशमुख, बजरंग बहादुर सिंह और जिला कोषालय अधिकारी आर.एस. गवली को शामिल किया गया है। समिति को 5 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में वित्तीय लेनदेन, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों की वैधता की गहन पड़ताल की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर जनजाति कार्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

