— क्या सरकार इसीलिए देती है फंड? सिस्टम पर बड़ा सवाल…
डिंडौरी। गांवों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भेजी जाने वाली 5वें और 15वें वित्त आयोग की लाखों-करोड़ों रुपए की राशि अब डिंडौरी जिले में सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत सिमरिया में इस फंड के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के बजाय यह राशि निजी जरूरतों और गैर-जरूरी खर्चों में खर्च की जा रही है।

दरअसल ग्राम पंचायत सिमरिया की सरपंच गीताबाई और सचिव राममिलन परमार द्वारा 24 जनवरी 2026 को 5वें वित्त की राशि से अज्जू किराना एवं जनरल स्टोर्स से सामग्री खरीदी गई। बिल क्रमांक 10 में नारियल, अगरबत्ती, पल्लीदाना, चिरौंजी, सिंदूर, सुपारी, लौंग, सौंफ एवं अन्य वस्तुओं की कुल 17,710 रुपए की खरीदी दर्शाई गई है, जो पंचायत के विकास कार्यों से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं मानी जा रही।

इसी दिन एक अन्य बिल में साफ-सफाई से संबंधित सामग्री जैसे फूलझाड़ू, झाड़ू, निरमा पाउडर, फिनाइल, एसिड, पोछा आदि की 5,310 रुपए की खरीदी दर्ज की गई। वहीं 26 फरवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के नाम पर बूंदी, नमकीन, मलाई पेड़ा और नाश्ता प्लेट आदि की 13,046 रुपए की खरीदी दिखाई गई है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। “फोटो कॉपी” के नाम पर 10,442 रुपए का भुगतान बिना स्पष्ट विवरण के किया गया है। इसके अलावा “अन्य व्यय” के नाम पर 11,680 रुपए और “फर्नीचर मरम्मत” के नाम पर 39,950 रुपए खर्च धुंधले बिलों के जरिए किए गया है। बता दें कि इस प्रकार के कई बिल 5वें और 15वें वित्त आयोग की राशि का नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन पैसों से गांव में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित होनी थीं, वहां आज भी हालात बदहाल हैं। कई स्थानों पर नालियां अधूरी पड़ी हैं, सड़कें निर्माण के कुछ समय बाद ही उखड़ गईं, जबकि पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी संदेह को और गहरा कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निगरानी तंत्र सक्रिय नहीं है, जिसके चलते इस तरह की अनियमितताएं लगातार सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत सिमरिया में यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी हुई जांच में सरपंच और सचिव के खिलाफ हजारों रुपए की रिकवरी निकाली जा चुकी है, हालांकि जांच सीमित बिंदुओं तक ही सिमट कर रह गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो लाखों रुपए के गबन का खुलासा हो सकता है। वहीं अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

