— गांव की स्ट्रीट लाइट में ऐसा क्या खेल हुआ कि हजार की चीज़ दस हजार में खरीदी गई?
मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट खरीदी के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार बाजार में 100 से 1000 रुपए तक उपलब्ध स्ट्रीट लाइटों को पंचायतों में 9000 से 10000 रुपए तक की दर से खरीदा गया। इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए के गबन की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर स्ट्रीट लाइट खरीदी में सप्लायरों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच सांठगांठ कर सरकारी राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया गया। कमीशनखोरी के खेल में सस्ती और निम्न गुणवत्ता की लाइटों को ऊंचे दामों पर दिखाकर भुगतान कर दिया गया।
— भंडार क्रय नियमों की खुलेआम अनदेखी
मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियमों के तहत किसी भी सामग्री की खरीदी से पहले संबंधित पंचायत को सार्वजनिक सूचना जारी कर कोटेशन आमंत्रित करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में न तो कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही प्रतिस्पर्धात्मक दरें ली गईं। सीधे सप्लायर से सौदा कर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि जिले की कई ग्राम पंचायतों में यह खेल एक जैसे पैटर्न पर किया गया। सैकड़ों की संख्या में स्ट्रीट लाइट खरीदी गईं और फर्जी दरों के आधार पर बिल बनाकर भुगतान निकाल लिया गया।
— घटिया गुणवत्ता, जल्द खराब हुई लाइटें
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में लगाई गई अधिकांश स्ट्रीट लाइट कुछ ही समय में बंद हो गईं। इससे साफ संकेत मिलता है कि खरीदी गई सामग्री न केवल महंगी थी, बल्कि गुणवत्ता में भी बेहद खराब थी। इससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
— ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग तेज
मामले के उजागर होने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर इस तरह की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
— जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज
यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और सप्लायरों की भूमिका सामने आ सकती है। ऐसे में बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह पूरा मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

