नई दिल्ली। देशभर के सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से उत्पन्न समस्याओं के समाधान को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश द्वारा किया गया, जिसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड एवं मध्यप्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा का गठन केवल सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दिलाने के उद्देश्य से किया जाएगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि मोर्चा का प्रयास रहेगा कि आरटीई अधिनियम में विधेयक अथवा अध्यादेश के माध्यम से आवश्यक संशोधन कराकर इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाई जाए।
बैठक में आगामी रणनीति भी तय की गई। निर्णय लिया गया कि 5 से 12 जुलाई के बीच विभिन्न राज्यों के सांसदों से मुलाकात कर उन्हें इस विषय में समर्थन पत्र सौंपे जाएंगे तथा संसद में आवश्यक विधेयक अथवा अध्यादेश लाने के लिए सहयोग का अनुरोध किया जाएगा।
इसके अलावा 19 जुलाई को नई दिल्ली में पुनः राष्ट्रीय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा के औपचारिक नाम की घोषणा की जाएगी। साथ ही देशव्यापी आंदोलन एवं आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा भी जारी की जाएगी।
प्रतिनिधियों ने यह भी तय किया कि संयुक्त मोर्चे के सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ संचालित किए जाएंगे, ताकि देशभर के सेवारत शिक्षकों की आवाज एक मंच से प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।
बैठक में जानकारी दी गई कि शीघ्र ही राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर टीईटी की अनिवार्यता से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराएगा और उनके सहयोग एवं समर्थन का आग्रह करेगा।
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रथम चरण में पाँच राज्यों की सहभागिता के बाद आगामी बैठकों में देश के अन्य राज्यों के शिक्षक संगठन भी इस अभियान से जुड़ेंगे, जिससे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप ले सकेगा।




