मध्य प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठने लगी है। नर्मदापुरम-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने का अनुरोध किया है।
सांसद चौधरी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि मध्य प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्तियां राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर बनाए गए नियमों और विधिक प्रावधानों के तहत की गई हैं। इन शिक्षकों ने पिछले लगभग 25 से 30 वर्षों से पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं देते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुभव और प्रयासों के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू होने से उनके बीच चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है। इससे उनके भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो रही है।
सांसद ने अपने पत्र में यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर देश के कुछ राज्यों द्वारा पहले ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जा चुकी है। ऐसे में उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से भी आग्रह किया है कि शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। सांसद चौधरी ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार के सकारात्मक हस्तक्षेप से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और इस मुद्दे का न्यायसंगत समाधान निकल पाएगा।

