TET Controversy News :  27 साल से नौकरी कर रहे शिक्षकों पर टीईटी का दबाव..? सरकार से आदेश वापस लेने की मांग…

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। जिले के शासकीय शिक्षकों ने TET परीक्षा से जुड़े हालिया आदेश का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। शासकीय शिक्षक संगठन जिला अध्यक्ष राम कुमार गर्ग के नेतृत्व में कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में मांग की है कि मध्यप्रदेश सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे और लोकशिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश को शीघ्र वापस लिया जाए।

 

 

ज्ञापन में बताया गया कि लोकशिक्षण संचालनालय गौतम नगर भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी पत्र में TET परीक्षा के संबंध में दिए गए निर्देशों को शिक्षक विरोधी बताया गया है। संगठन का कहना है कि आदेश जारी करने से पहले शासन स्तर पर मंत्रिमंडल या सचिवालय से आवश्यक सलाह-मशविरा और अनुमोदन लिया गया हो, ऐसा स्पष्ट नहीं है।

 

 

शिक्षक संगठन ने यह भी कहा कि TET से संबंधित मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सिविल अपील 1385/2025 में विचाराधीन है, जिसमें याचिकाकर्ता एक अशासकीय शिक्षण संस्था है और उत्तरदाता राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) है। संगठन का सवाल है कि क्या NCTE द्वारा सभी राज्यों को इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

 

 

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश के अधिकांश शिक्षक शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक व्यवस्था से होते हुए सेवा में आए हैं और उनकी नियुक्ति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (सिविल अपील 4032/1995) के आधार पर लागू नियमों के तहत की गई थी। उस समय लागू भर्ती अधिनियमों और सेवा शर्तों में TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था।

 

 

संगठन का तर्क है कि सिविल अपील 2634/2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ऐसे में वर्तमान आदेश नियमों और न्यायालय के पूर्व निर्णयों के विपरीत प्रतीत होता है। शिक्षक संगठन ने चेतावनी दी है कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों में असंतोष और भय का माहौल बन गया है। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कराते हुए इस आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।

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