— जांच समिति ने माना शासकीय राशि का गबन, सरपंच-सचिव से एक-एक लाख रुपये की वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा
डिंडौरी। जिले के समनापुर जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोकोमेटा के भरी टोला में “पुराने कुएं को नया बताकर 2 लाख रुपये का भुगतान” किए जाने का मामला, जिसे जनधारा न्यूज़ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, अब जांच में सही पाया गया है। जनपद पंचायत समनापुर द्वारा गठित जांच दल ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस पूरे मामले को शासकीय राशि के गबन एवं गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए संबंधित सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।
दरअसल जांच प्रतिवेदन के आधार पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत समानापुर ने जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र भेजकर बताया है कि प्रकाशित समाचार के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच टीम में विकासखंड पंचायत अधिकारी, सहायक वित्त अधिकारी एवं उपयंत्री शामिल थे, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थल निरीक्षण, पंचनामा, ग्रामीणों के बयान तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
जांच में सामने आया कि जिस कुएं को नवीन निर्माण बताकर लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान किया गया, वह वास्तव में करीब 50 वर्ष पुराना कुआं है। ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि वहां कोई नया कुआं नहीं बनाया गया, बल्कि केवल कुएं के ऊपर सीमित मरम्मत और जगत का कार्य किया गया था। कुएं में लगभग पांच फीट तक गाद भरी मिली, जिससे यह भी स्पष्ट हुआ कि हाल के समय में कोई नया निर्माण या उपयोग योग्य कार्य नहीं हुआ।
जांच के दौरान वर्तमान सरपंच रामकिशन धुर्वे एवं सचिव प्रह्लाद सिंह ठाकुर ने भी अपने बयान में स्वीकार किया कि नया कुआं नहीं बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व में हुए जीर्णोद्धार कार्य के भुगतान को लेकर विवाद था, जिसके चलते बाद में नवीन टीएस बनाकर भुगतान किया गया। वहीं तत्कालीन सचिव के बयान में भी वर्ष 2022 में कुएं के जीर्णोद्धार कार्य का उल्लेख किया गया है।
जांच समिति ने पाया कि कथित जीर्णोद्धार कार्य से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृति, पुरानी नस्ती तथा सक्षम अधिकारी की अनुमति उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से प्राप्त भुगतान विवरण और स्थल निरीक्षण में भी नवीन निर्माण का कोई प्रमाण नहीं मिला। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बिना वास्तविक निर्माण कार्य के नवीन कुएं के नाम पर राशि निकालना गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
जांच प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि वास्तव में पूर्व में जीर्णोद्धार कार्य कराया गया था और उसका भुगतान शेष था, तब भी निर्धारित शासकीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। संबंधित सामग्री आपूर्ति, भुगतान अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जिससे संपूर्ण प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई।
जांच समिति ने स्पष्ट रूप से अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि नवीन कुएं के निर्माण के नाम पर 2 लाख रुपये का आहरण शासकीय राशि का गबन है। रिपोर्ट के अनुसार इस राशि की एक-एक लाख रुपये सरपंच रामकिशन धुर्वे और सचिव प्रह्लाद सिंह ठाकुर से अलग-अलग वसूली की जानी चाहिए। साथ ही दोनों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।
गौरतलब है कि जनधारा न्यूज़ ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। समाचार के बाद हुई जांच में आरोपों की पुष्टि होने से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि जनधारा न्यूज़ द्वारा उठाया गया मुद्दा तथ्यात्मक था। अब निगाहें जिला पंचायत प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों के विरुद्ध कब और क्या कार्रवाई होती है।
— पूर्व में प्रकाशित खबर




