— गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में अंदरखाने क्या चल रहा है? कार्रवाई के बाद बनी जांच समिति
मंडला। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी मध्यप्रदेश में पार्टी के भीतर बयानबाजी और सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप को लेकर विवाद सामने आया है। पार्टी की ओर से जारी पत्रों के अनुसार पहले कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए संगठन से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया, लेकिन बाद में समन्वय के अभाव का हवाला देते हुए उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया और मामले की जांच के लिए एक समन्वय समिति गठित कर दी गई है।
प्रदेश कार्यालय से 5 मार्च 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मंडला में आयोजित बैठक में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से की जा रही टिप्पणी और संगठन की छवि धूमिल करने के आरोपों पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ टिप्पणी की गई, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हुई है।


इस मामले को गंभीर मानते हुए पार्टी संगठन द्वारा जांच कर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। पत्र में उल्लेख किया गया कि देवीराम उर्फ देवरावन भलावी, पूर्व जिला अध्यक्ष छिंदवाड़ा, को पार्टी संगठन के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने, सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की छवि धूमिल करने और अलग संगठन बनाने की धमकी देने के आरोप में संगठन से छह वर्ष के लिए निष्कासित किया गया है।
इसी प्रकार प्रवीण धुर्वे, युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष छिंदवाड़ा, पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों और सोशल मीडिया पर संगठन के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित करने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा संदीप इनवाती, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष छिंदवाड़ा, को भी सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी की छवि खराब करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से छह वर्षों के लिए संगठन से बाहर करने की कार्रवाई की जानकारी दी गई।
पत्र में यह भी बताया गया कि रावेशाह उइके, छपारा जिला सिवनी, द्वारा भी पार्टी विरोधी गतिविधियों और सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से पार्टी की छवि धूमिल करने का आरोप सामने आया है, जिसके चलते उन्हें भी छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया।
इसके अलावा कुछ अन्य पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि पार्टी नेतृत्व के खिलाफ व्यंग्यात्मक टिप्पणी करने और सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी प्रसारित कर संगठन की छवि खराब करने के आरोप में रामगुलाम उइके (पूर्व विधायक, सिवनी) तथा ए. महेश बट्टी (प्रदेश पदाधिकारी, सिवनी) से 15 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब देने को कहा गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हालांकि इसी दिन जारी एक अन्य पत्र में कहा गया कि उक्त निष्कासन संबंधी प्रेस विज्ञप्ति समन्वय के अभाव में जारी कर दी गई थी, इसलिए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने लाने के लिए पार्टी की ओर से एक समन्वय समिति गठित की गई है।

समिति में अमन सिंह पोते (राष्ट्रीय महासचिव), अजय प्रताप सिंह (पूर्व राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी), हरेंद्र सिंह मार्को (राष्ट्रीय संगठन मंत्री), महलाल वर्कड़े (राष्ट्रीय सचिव) तथा तेजप्रताप सिंह उइके (प्रदेश संगठन मंत्री, मध्यप्रदेश) को सदस्य बनाया गया है।
समिति के सदस्यों से अनुरोध किया गया है कि वे संबंधित जिलों का दौरा कर पूरे मामले की जांच करें और पक्षकारों से चर्चा कर विवाद के समाधान के लिए रिपोर्ट तैयार करें। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी रिपोर्ट 10 मार्च 2026 तक प्रदेश नेतृत्व को सौंपे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार संगठन के भीतर सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी कारण नेतृत्व ने जांच के माध्यम से पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और संगठन में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया





