— मार्च से पूरे प्रदेश में शुरू होगा अभियान, जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास का आधार भी है। यह अभियान भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि अभियान की प्रत्येक गतिविधि में राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री मंत्रालय में आयोजित बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। बैठक में वर्ष 2025 के अभियान की उपलब्धियों और वर्ष 2026 की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूजल स्रोतों के अत्यधिक दोहन, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह का प्रभाव समाज पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों में किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और इन क्षेत्रों की सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने और उनके आसपास व्यापक पौधरोपण करने की बात कही। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत तथा सामुदायिक पहल से प्याऊ लगाने की परंपरा को बढ़ावा देने, प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था को सामाजिक दायित्व के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने अनुभव अन्य जिलों के साथ साझा करें। इससे पूरे प्रदेश में अभियान को प्रभावी और परिणाममूलक बनाया जा सकेगा। उन्होंने प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, पंचायत और नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी के रूप में अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से पूरे प्रदेश में एक साथ शुरू किया जाएगा। अभियान के तहत जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जलीय संरचनाओं के संवर्धन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 23 से 24 मई तक भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन, 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा तथा 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर उज्जैन में महादेव नदी कथा का आयोजन होगा। इसके अलावा 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 170 करोड़ रुपये की लागत से 2200 जल संरक्षण कार्यों का क्रियान्वयन करेगा। वर्ष 2025 में प्रारंभ किए गए 2500 करोड़ रुपये की लागत के 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को भी पूर्ण किया जाएगा।
नगरीय विकास विभाग नगरीय निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। इसके साथ ही 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने और नदियों में मिलने वाले 20 नालों के शोधन का लक्ष्य रखा गया है।
वन विभाग वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधों के रोपण की योजना पर कार्य करेगा तथा वन्य जीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए 25 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण कराया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केंद्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्थापित करने और पोषण वाटिका विकसित करने जैसी गतिविधियां संचालित करेगा, जिससे जल संरक्षण के प्रति समुदाय को प्रेरित किया जा सके। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग हेतु 16 हजार रुपये और पोषण वाटिका के लिए 10 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सोर्स :— जनसंपर्क विभाग, मध्यप्रदेश।




