MP Education Update : वर्षों से नौकरी कर रहे शिक्षकों पर TET की तलवार, मुख्यमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजे गए पत्र…

Rathore Ramshay Mardan
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भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर चिंता और असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अलग-अलग पत्र भेजकर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने और इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करने की मांग की गई है।

 

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुसार की गई थी। इन शिक्षकों ने लगभग 25 से 30 वर्षों तक निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुभव और प्रयासों से विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू होने से उनके बीच असमंजस और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस विषय में देश के कुछ राज्यों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जा चुकी है, इसलिए मध्यप्रदेश सरकार से भी इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया गया है।

 

वहीं पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक और अध्यापक जैसे विभिन्न पदों पर बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने कम वेतन से अपनी सेवा की शुरुआत करते हुए पूर्ण समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

पत्र में कहा गया है कि इतने वर्षों की सेवा और अनुभव के बाद शिक्षकों को पुनः शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से स्वयं को साबित करने की बाध्यता उनके सम्मान के विपरीत है। इससे शिक्षक समाज में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए राहत प्रदान करने का रास्ता निकाला जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अधिनियम में संशोधन पर भी विचार किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि इस विषय में शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक समाज आंदोलन का रास्ता भी अपना सकता है। देखें पत्र

 

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