— TET पास नहीं करने पर शिक्षकों को छोड़नी पड़ सकती है नौकरी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग सख्त
(जनधारा डेस्क) माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली ने इस संबंध में सभी संकुल प्राचार्यों को पत्र जारी कर ऐसे शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने की सूचना देने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने अभी तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
जारी आदेश में बताया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के तहत सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 सहित अन्य याचिकाओं में 1 दिसंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इसके तहत आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए दो वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
यदि निर्धारित समयावधि में शिक्षक टीईटी परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सेवा से अलग होना पड़ सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार पात्र शिक्षकों को सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा का आयोजन जुलाई और अगस्त 2026 में संभावित है। इसलिए सभी संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि जिन शिक्षकों ने अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें समय रहते परीक्षा में शामिल होने के लिए सूचित किया जाए। शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद जिले के कई शिक्षकों में हलचल देखी जा रही है, क्योंकि अब सेवा में बने रहने के लिए टीईटी परीक्षा पास करना जरूरी हो गया है। देखें आदेश…

