Mp Education Update : सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बड़ा फैसला !  अब प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य….

Rathore Ramshay Mardan
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जबलपुर संभाग में निर्देश जारी, दो साल के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करना होगा, जुलाई-अगस्त 2026 में होगी विशेष परीक्षा

जबलपुर। जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के संभागीय उपायुक्त द्वारा जारी आदेश के बाद प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह आदेश माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देशों के पालन में जारी किया गया है।

 

जारी निर्देशों के अनुसार, सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 सहित अन्य मामलों में दिए गए निर्णय के तहत शिक्षकों को आगामी दो वर्षों के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। साथ ही जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाएगी।

 

यह आदेश जबलपुर संभाग के मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, कटनी और नरसिंहपुर जिलों में लागू किया गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे यह जानकारी सभी शिक्षकों तक पहुंचाएं।

विरोध के स्वर भी हुए तेज

 

वहीं पूरे मामले को लेकर शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विभाग की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर कौन से शिक्षक इस परीक्षा के दायरे में आएंगे।

 

 

राम कुमार गर्ग के अनुसार, शिक्षाकर्मियों ने पहले ही साक्षात्कार प्रक्रिया उत्तीर्ण की है। वर्ष 2001/2003 में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई थी, जबकि 2005/2008 में संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही शिक्षक बने हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि नए नियम किन पर लागू होंगे।

 

 

उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है और जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक प्रशासन शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसी के साथ शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन का ऐलान करते हुए कहा है कि 8 अप्रैल को मध्यप्रदेश के सभी जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। शिक्षकों से बड़ी संख्या में जिला मुख्यालयों पर पहुंचने की अपील की गई है।मोर्चा के अनुसार, यह लड़ाई किसी संगठन की नहीं बल्कि शिक्षकों की नौकरी और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है, और यह संघर्ष लंबा चल सकता है।

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