भोपाल। मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस की करीब 10.99 करोड़ रुपए की खरीद में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद चार आरोपियों सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि वर्ष 2024 में GeM पोर्टल के माध्यम से की गई खरीद के लिए टेंडर में शामिल चार फर्में आपस में प्रतिस्पर्धा करती दिखाई गईं, लेकिन जांच में इनके बीच आपसी संबंध और एक ही व्यक्ति से जुड़े होने के संकेत मिले। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, पुराने और घटिया सामान को नया बताकर सप्लाई किया गया तथा अधिक कीमत वसूलकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
मामले में 1 सितंबर 2026 को रंधीर कुमार पटेल, हेमंत पटेल, अशोक कुमार सिंह और देवेंद्र सिंह सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 318(4), 336(3) एवं 340(2) के तहत अपराध क्रमांक 93/2026 दर्ज किया गया है।
— एक ही मोबाइल नंबर, ई-मेल और पते से जुड़े मिले फर्मों के तार
EOW की जांच में GeM रिकॉर्ड से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मेसर्स शांति ट्रेडर्स का मोबाइल नंबर मेसर्स साइंबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ा पाया गया। वहीं, मेसर्स ए.टी.एम. इंडिया की ई-मेल आईडी भी साइंबा कंपनी के नाम से संबंधित बताई गई। दोनों फर्मों का पता भी एक ही बिल्डिंग का पाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि चारों फर्में केवल इसी एक टेंडर में नहीं, बल्कि GeM पोर्टल के कई अन्य टेंडरों में भी एक-दूसरे के खिलाफ बोली लगाती रही हैं। इनके द्वारा लगाए गए रेट भी एक-दूसरे के काफी करीब पाए गए और अलग-अलग टेंडरों में बारी-बारी से इन्हीं में से किसी एक फर्म को काम मिलने की बात सामने आई है।
— फर्जी अधिकृत विक्रेता बनने का आरोप
जांच के दौरान फर्मों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की भी जांच की गई। एक फर्म ने GeM पोर्टल पर खुद को Acer Veriton Z469G मॉडल का अधिकृत विक्रेता दर्शाया था, जबकि ACER India के रिकॉर्ड में संबंधित फर्म को ऐसा अधिकार पत्र जारी किए जाने की जानकारी नहीं मिली। EOW के अनुसार, यह दर्जा कथित रूप से नकली कागजात के आधार पर लिया गया था।
— पुराना माल नया बताकर सप्लाई करने का आरोप
विभाग को सप्लाई किए गए कंप्यूटरों के वारंटी रिकॉर्ड की जांच में उनके निर्माण की तारीख 22 जुलाई 2024 दर्ज पाई गई, जबकि विभाग ने उक्त सामान की खरीद बाद में सितंबर 2024 के टेंडर के माध्यम से की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इससे पुराने माल को नया बताकर सप्लाई किए जाने की आशंका सामने आई है।
— 3,754 रुपए का UPS 11,247 रुपए में खरीदा
जांच में यूपीएस की खरीद में भी गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिस यूपीएस की कीमत 6,086 रुपए थी और वही सामान GeM पोर्टल पर 3,754 रुपए में उपलब्ध था, उसे विभाग द्वारा 11,247 रुपए में खरीदा गया। दस्तावेजों में एक मॉडल नंबर दर्ज होने और वास्तविक सप्लाई में दूसरा मॉडल पाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन तथ्यों के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल ने मामला दर्ज कर लिया है। प्रकरण की विवेचना जारी है और जांच के बाद मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
