— आवेदक दीपक ठाकु की शिकायत पर हुई विभागीय जांच, आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक ने सुनाया बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश में डिंडौरी जिले में पहली पत्नी से विधिवत तलाक लिए बिना दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह संबंध स्थापित करने और उससे दो बच्चों के जन्म का मामला डिंडौरी पुलिस विभाग में एक बड़ी कार्रवाई का कारण बन गया। आवेदक दीपक ठाकुर द्वारा की गई शिकायत के आधार पर आरक्षक क्रमांक 244 रोहन सिंह मरावी के खिलाफ विभागीय जांच की गई। जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडौरी ने आरक्षक को “सेवा से पृथक” करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है।
— ये रहा पूरा मामला
आदेश के अनुसार आरक्षक रोहन सिंह मरावी चौकी गोपालपुर में पदस्थ थे और वर्तमान में रक्षित केंद्र डिंडौरी से संबद्ध थे। उनके विरुद्ध विभागीय जांच क्रमांक 02/2025 संचालित की गई।
— आवेदक दीपक ठाकुर ने की थी शिकायत
विभागीय आदेश में उल्लेख है कि आवेदक दीपक ठाकुर द्वारा शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरक्षक रोहन सिंह मरावी ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 22(1)(2) का उल्लंघन करते हुए पहली पत्नी से कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी महिला से संबंध स्थापित कर उसके साथ पति-पत्नी की तरह जीवन व्यतीत किया।
— दो बच्चों के दस्तावेज बने अहम साक्ष्य
विभागीय जांच के दौरान समग्र आईडी, परिवार आईडी, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज सहित अन्य अभिलेखों की जांच की गई। जांच में दूसरी महिला पार्वती बाई से आरक्षक रोहन सिंह मरावी के एक पुत्र और एक पुत्री होने के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए।
जांच अधिकारी ने दस्तावेजों और गवाहों के कथनों के आधार पर पाया कि आरक्षक और पार्वती बाई के संबंध से दो बच्चों का जन्म हुआ है, जबकि पहली पत्नी सावित्री बाई से विधिवत तलाक लिए जाने का कोई वैधानिक दस्तावेज विभागीय जांच में प्रस्तुत नहीं किया गया।
पहली पत्नी से अलग रहने का दिया तर्क
आरक्षक रोहन सिंह मरावी ने अपने जवाब में कहा कि उनका अपनी पत्नी सावित्री बाई से लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि भरण-पोषण को लेकर न्यायालयीन आदेश के तहत राशि का भुगतान किया जा रहा है।
हालांकि विभागीय जांच में यह पाया गया कि अलग-अलग रहने या पारिवारिक विवाद के बावजूद वैधानिक रूप से तलाक लिए जाने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच अधिकारी ने दोनों आरोपों को प्रमाणित माना।
— पुलिस की छवि धूमिल करने का भी आरोप
आरक्षक पर दूसरा आरोप यह भी था कि उनके आचरण से आम जनता के बीच पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई। विभागीय जांच में इस आरोप को भी गंभीर माना गया। आदेश में कहा गया कि विवाहित रहते हुए वैधानिक तलाक के बिना दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी के रूप में रहना और संतान उत्पन्न करना सेवा आचरण नियमों के विपरीत है।
— 299 दिन निलंबित रहने के बाद सेवा से पृथक
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक रोहन सिंह मरावी को पहले निलंबित किया गया था। आदेश के अनुसार वे 27 मार्च 2025 से 10 जनवरी 2026 तक कुल 299 दिन निलंबित रहे। विभागीय जांच में दोनों आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडौरी ने आरक्षक रोहन सिंह मरावी को “सेवा से पृथक” करने का दंडादेश जारी किया है। आदेश में उनके निलंबन की अवधि को भी “निलंबन में गुजारना” निराकृत किया गया है।
