— संस्था की जमीन बेचकर करोड़ों का खेल, EOW जांच में सामने आया बड़ा वित्तीय घोटाला
मध्यप्रदेश के इंदौर की करण गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित में करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों सहित 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
ये रहा पूरा मामला
दरअसल EOW द्वारा जारी पत्र के मुताबिक आरोप है कि संस्था की भूमि को शासन की गाइडलाइन दरों के विपरीत बेहद कम कीमत पर बेचकर करीब 3.37 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
जांच में सामने आया कि संस्था की आमसभा ने वर्ष 2005 में निर्णय लिया था कि भूमि विक्रय से प्राप्त राशि से सदस्यों के लिए नई भूमि खरीदी जाएगी। इसके बाद वर्ष 2008 में उप पंजीयक सहकारी संस्था द्वारा इस शर्त पर अनुमति दी गई थी कि भूमि का विक्रय कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार किया जाएगा।
लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी द्वारा संस्था की भूमि, जिसकी गाइडलाइन कीमत लगभग 3 करोड़ 37 लाख रुपये थी, उसे मात्र 50 लाख रुपये में बेच दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार यह जमीन रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को बेची गई थी।
ईओडब्ल्यू जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भूमि विक्रय से प्राप्त राशि संस्था के सदस्यों के हित में उपयोग नहीं की गई, बल्कि संबंधित कंपनियों और परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर उसका दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि रकम का उपयोग तेजकरण इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य निजी कंपनियों के माध्यम से किया गया।
जांच रिपोर्ट और ऑडिट दस्तावेजों के आधार पर कुल 3 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। मामले में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी, उनकी पत्नी नम्रता राठी सहित संबंधित कंपनियों के संचालकों को आरोपी बनाया गया है। ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
