मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में आस्था, शांति और विश्वास की नगरी। जहां हर सुबह मां नर्मदा के जयकारों से होती है। जहां दूर-दूर से लोग इस पवित्र धारा के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इन दिनों इसी पवित्र नगरी से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है। जो न सिर्फ हैरान करती है, बल्कि कई बड़े सवाल भी खड़े करती है। बता दें कि कभी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा था कि नर्मदा किनारे से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। मकसद साफ था, आस्था की पवित्रता बनी रहे, मां नर्मदा का सम्मान सुरक्षित रहे।लेकिन आज वो फैसला, वो घोषणा सिर्फ फाइलों और कागजों में सिमट कर रह गई है। जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
दरअसल इन दिनों डिंडौरी जिले शराब कारोबारियों द्वारा घर—घर अवैध शराब परोसने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिये उन्होने बकायदा गांव-कस्बों तक मे अपने पता ठिकाने खोल दिए हैं। मामला जिम्मेदारों के संज्ञान में भी है बावजूद इसके शराब विक्रेताओं पर कार्यवाही नहीं की जा रही है। प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं नतीजतन शराब विक्रेता भी बेखौफ हो इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक जिले में शासन द्वारा देशी-विदेशी शराब की पांच दुकाने गाड़ासरई, करंजिया,समनापुर, शहपुरा में स्वीकृत की गईं हैं। लेकिन ठेकेदार ठेके की लागत की भरपाई के लिये इन स्वीकृत दुकानों से महंगे दामो में शराब बेंचने के आरोप भी आए दिन लगते हो रहते हैं। जबकि शासन के नियमानुसार बोतल में छपी एम आर पी और एम एस पी के मध्य या दर्शाई गई दरों पर विक्रय की जा सकती है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार का ठेका तक रद्द किया जा सकता है। लेकिन लगता है जिले में शासन के बनाये नियम कायदे लागू नहीं होते।
गौरतलब यह है कि शराब के कारोबार को कारोबारियों द्वारा बड़े ही शातिर तरीके से जिला मुख्यालय में ठेकेदार के गुर्गों के द्वारा बिना नंबर की स्कूटी, मोटरसाइकिल से बैगों भरकर खुलेआम शराब की खेत ठिकानों तक पहुंचाई जा रही है। इसके लिये बाकायदा आदमी लगा रखे हैं, जो मारुति वाहन या बोलेरो वाहन, के माध्यम से गांव कस्बों तक बेहद आसानी से शराब पहुंचाने का कार्य करते हैं। जिले मे शायद ही ऐसे कोई गांव कस्बे होंगे जहां शराब की खेप न पहुंच रही हो। बावजूद जिमेदार और जवाबदार चुप्पी साधे हुए हैं। कागजी खाना पूर्ति में उलझा विभाग यदि संबंधित विभाग की बात की जाये तो वह सिर्फ और सिर्फ कागजी खाना पूर्ति तक ही सीमित है। ऐसे में मजबूर हो अनेकों दफा जानकारी प्राप्त होने पर आबकारी विभाग, और पुलिस द्वारा कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है। छोटे मोटे प्रकरण बना दिये जाते हैं।
अभी ताजा मामला विगत दिनों की है जहां समनापुर शराब दुकान से शराब की खेत जिला मुख्यालय लाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें जागरूक ग्रामीणों के द्वारा विगत दिनों अवैध शराब का खेप पकड़ा गया है जिसमें बिना नंबर की स्कूटी वहां पर एक लड़का बैग में शराब की सैकड़ो बोतल रखा हुआ है ग्रामीणों के द्वारा पहुंचने पर अपना नाम बताते हुए अपने सेठ का नाम बता रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब ग्रामीणों के द्वारा अवैध शराब की पकड़ने की जानकारी विभाग को देनी चाही लेकिन जिम्मेदारोंं के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
अब सवाल यह कि आबकारी पुलिस, यातायात पुलिस, कोतवाली पुलिस, सैकड़ों सीसीवीटी कैमरों के निगरनी के बावजूद जिले खुले आम पहुंच रही शराब की अवैध खेप आखिर कैसे सम्भव है। जो जिम्मेदारों कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ी कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या जिम्मेदारों के द्वारा शराब की अवैध कारोबार पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है। या यू ही यह गोरख धंधा चलता रहेगा। खैर…?
