Dindori News : ड्यूटी सरकारी, मरीज निजी! शहपुरा बीएमओ पर अस्पताल परिसर में निजी प्रैक्टिस के गंभीर आरोप…

Rathore Ramshay Mardan
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मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुमार द्विवेदी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री, संभाग आयुक्त जबलपुर, कलेक्टर डिंडौरी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत भेजी गई है।

दरअसल शिकायतकर्ता तीरथ प्रसाद झारिया, ग्राम गुरैया ने शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रभारी बीएमओ द्वारा शासकीय अस्पताल परिसर एवं शासकीय आवास में निजी मरीजों को देखा जाता है और ड्यूटी के निर्धारित समय में भी निजी मरीजों का उपचार किए जाने की शिकायत है। शिकायत में इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 16 के विपरीत बताया गया है।

ड्यूटी के दौरान निजी मरीज देखने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि डॉ. द्विवेदी शासकीय अस्पताल में प्रशासनिक पद पर कार्यरत होने के बावजूद कथित रूप से ड्यूटी समय में निजी क्लीनिक संचालित करते हैं। शिकायतकर्ता ने 13 जनवरी 1999 के संबंधित शासन परिपत्र का हवाला देते हुए मामले की जांच की मांग की है।

शासकीय दवाओं के संबंध में भी शिकायत

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में उपलब्ध नि:शुल्क दवाओं के संबंध में मरीजों को कथित तौर पर नकारात्मक अथवा भ्रामक जानकारी देकर बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इससे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता है और निजी दवा बिक्री से कमीशन लिए जाने की भी जांच की जानी चाहिए।

जांच सुविधाओं से मरीजों को कथित रूप से दूर रखने का आरोप

शिकायत में शासकीय अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मरीजों को कथित रूप से शासकीय जांच सुविधाओं की कमियां बताकर निजी स्तर पर जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

बिना पंजीयन क्लीनिक संचालन का आरोप

शिकायत में मध्यप्रदेश उपचर्या तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 की धाराओं का उल्लेख करते हुए शासकीय अस्पताल परिसर में कथित निजी क्लीनिक के पंजीयन एवं संचालन की वैधानिकता की जांच की मांग की गई है।

पांच वर्षों की आय और संपत्ति की जांच की मांग

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले करीब पांच वर्षों से अस्पताल परिसर में निजी क्लीनिक के माध्यम से मरीजों से शुल्क लेकर उपचार किया जा रहा है और कथित आय का पूरा विवरण आयकर रिटर्न में घोषित नहीं किया जाता। शिकायतकर्ता ने आयकर अधिनियम की धारा 270A का हवाला देते हुए पूर्व वर्षों के आयकर रिटर्न, बैंक खातों तथा चल-अचल संपत्तियों की जांच की मांग की है।

नियमों और न्यायालयीन आदेशों का दिया हवाला

शिकायत में मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न जीएडी सर्कुलर, शासकीय आवास/क्वार्टर नियम, मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 16 तथा संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठान पंजीयन कानून का उल्लेख किया गया है। साथ ही डॉ. हंसा बरिया से संबंधित 10 दिसंबर 2024 के न्यायालयीन निर्णय का भी हवाला दिया गया है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत में विशेष रूप से कहा गया है कि जांच के दौरान संबंधित वित्तीय लेन-देन और चिकित्सा सेवाओं के नाम पर होने वाली कथित वसूली की भी जांच की जाए।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी अथवा स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

 

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