— 10 महीने पढ़ाई, 10 महीने फीस: कलेक्टर ने निजी स्कूलों को दी अंतिम चेतावनी
डिंडौरी। जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली को लेकर उठे सवालों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। “जनधारा न्यूज” द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर अब साफ नजर आने लगा है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने अशासकीय विद्यालयों की समीक्षा बैठक लेकर स्पष्ट कर दिया है कि अब जिले में किसी भी प्रकार की फीस अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सीबीएसई, आईसीएसई एवं एमपी बोर्ड से संबद्ध निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सत्र 2027-28 की मान्यता, अपग्रेडेशन और नवीनीकरण से जुड़े विषयों के साथ-साथ फीस संरचना को लेकर विशेष चर्चा की गई।
10 महीने की पढ़ाई, तो फीस भी 10 महीने की कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि सभी स्कूल केवल 10 माह के वास्तविक संचालन के आधार पर ही फीस वसूलें। 12 महीने की फीस वसूली को पूरी तरह अनुचित बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्कूल द्वारा अतिरिक्त शुल्क लिया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला उन अभिभावकों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है, जो लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे थे।
मनमानी फीस वसूली पर सख्त रुख बैठक में कलेक्टर ने दो टूक कहा कि शासन द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी। सभी स्कूलों को नियमों के पालन का शपथ पत्र एजुकेशनल पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों के आधार कार्ड सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों को भी समय पर पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करने को कहा गया।
पुस्तक-यूनिफॉर्म में भी नहीं चलेगी जबरदस्ती अभिभावकों की एक और बड़ी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कोई भी विद्यालय बच्चों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। अभिभावकों को खुली छूट दी जाएगी कि वे अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकें।
स्कूल वाहनों और सुरक्षा पर भी सख्ती छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने स्कूल वाहनों के संचालन पर भी कड़े निर्देश दिए। सभी चालकों की योग्यता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा हर स्कूल में बाल सुरक्षा समिति और पॉक्सो समिति का गठन अनिवार्य कर दिया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के संकेत बैठक में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, लाइब्रेरी, खेल मैदान और सह-शैक्षणिक गतिविधियों के नियमित संचालन पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल शुल्क वसूली का माध्यम नहीं, बल्कि गुणवत्ता और संस्कार का केंद्र होना चाहिए।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत ज्ञात हो कि हाल ही में जिले के एक निजी विद्यालय में 10 महीने की पढ़ाई के बदले 12 महीने की फीस वसूली और ‘एक्टिविटी फीस’ के नाम पर हजारों रुपए लेने का मामला सामने आया था, जिसे “जनधारा न्यूज” ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर के बाद अभिभावकों में आक्रोश बढ़ा और प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठी।
अब प्रशासन की सख्ती के बाद अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह कार्रवाई न केवल जिले के स्कूलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
— पूर्व में प्रकाशित खबर …
