Dindori School Fees Issue : शिक्षा या कारोबार..? 10 महीने की पढ़ाई पर 12 महीने की फीस और ‘एक्टिविटी’ के नाम पर हजारों की वसूली पर उठे बड़े सवाल…

Rathore Ramshay Mardan
4 Min Read

 

पढ़ाई कम, वसूली ज्यादा! डिंडौरी में फीस स्ट्रक्चर पर उठे बड़े सवाल

डिंडौरी। शिक्षा को कभी सेवा और संस्कार का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब यही शिक्षा कुछ संस्थानों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले के शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत बरगांव स्थित नर्मदांचल विद्यापीठ का ताजा मामला इसी कड़वी हकीकत को उजागर करता है। दरअसल स्कूल प्रबंधन द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी संशोधित फीस स्ट्रक्चर ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

फीस का गणित या लूट का फॉर्मूला?

स्कूल द्वारा जारी फीस चार्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों से 10 महीने की पढ़ाई के बदले 12 महीने की फीस वसूली जा रही है। यानी गर्मी की छुट्टियों सहित अन्य अवकाशों के बावजूद अभिभावकों से पूरे साल का शुल्क लिया जा रहा है। इसे लेकर अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

 

— नन्हे बच्चों से ही ‘कमाई’ की शुरुआत

प्री-प्राइमरी (नर्सरी, LKG, UKG) के मासूम बच्चों से सालाना ₹8,800 की वसूली तय की गई है। इसमें ₹500 प्रतिमाह के हिसाब से 12 महीने की फीस के अलावा एडमिशन और एक्टिविटी फीस भी शामिल है। सवाल उठता है कि खेल-खेल में सीखने वाले इन बच्चों पर इतनी आर्थिक मार क्यों?

— हर क्लास के साथ बढ़ता बोझ

कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए ₹11,050, मिडिल स्कूल में ₹13,450, हाई स्कूल में ₹18,050 और हायर सेकेंडरी में यह आंकड़ा ₹22,650 तक पहुंच गया है। खासतौर पर एक्टिविटी फीस के नाम पर ₹1,000 से लेकर ₹6,000 तक की वसूली ने अभिभावकों को हैरान कर दिया है।

एक्टिविटी या कमाई का जरिया?

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में साल भर ऐसी कोई विशेष गतिविधि नहीं होती, जिससे इतनी भारी फीस वसूली जायज ठहराई जा सके। वहीं ‘होम एग्जाम फीस’ के नाम पर अलग से ₹300 से ₹800 तक लिए जा रहे हैं।

छूट का दिखावा, राहत नहीं

स्कूल प्रबंधन ने भाई-बहनों की फीस और एकमुश्त भुगतान पर 10% छूट का प्रावधान रखा है, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा है। उनका आरोप है कि पहले फीस को कई गुना बढ़ाया गया और फिर छूट का लालच देकर उसे सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है।

 

अभिभावकों का फूटा गुस्सा

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि “हम मजदूरी कर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन इस तरह की फीस वसूली से बच्चों की पढ़ाई छुड़ाने की नौबत आ रही है।” उनका सीधा सवाल है—जब पढ़ाई 10 महीने की है, तो 12 महीने की फीस क्यों? वहीं मामले को लेकर अब अभिभावकों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि स्कूल की फीस संरचना की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि ‘एक्टिविटी फीस’ और अतिरिक्त महीनों की फीस आखिर किस आधार पर ली जा रही है। देखें फीस की पूरी लिस्ट…

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