— किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में निकिता कुलस्ते ने किया संवाद, विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और फसल प्रबंधन की दी जानकारी
डिंडौरी। बदलती जलवायु के बीच छोटे एवं सीमांत किसानों को कृषि के क्षेत्र में अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास सेवा समिति (GVSS) एवं सस्टेनेबल डेवलपमेंट फाउंडेशन (SDF) के संयुक्त सहयोग से डिंडौरी में तीन दिवसीय किसान फील्ड विजिट एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 8 से 10 सितंबर तक चल रहे “Integrated Climate Adaptation Program for Small and Marginal Farmers” के तहत किसानों को जलवायु परिवर्तन से कृषि पर पड़ रहे प्रभावों और उनसे निपटने की व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन निकिता कुलस्ते प्रशिक्षण स्थल पहुंचीं और किसानों से संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कराई जा रही गतिविधियों की जानकारी ली तथा किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए कृषि में नई, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के महत्व पर चर्चा की।
कार्यक्रम में JNKVV से देशमुख ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन और जलवायु के अनुरूप खेती की पद्धतियों को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन दिया। वहीं SDF की ओर से जसप्रीत कौर ने प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया और किसानों से संवाद कर जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।
इस अवसर पर अंजना लखेड़ा, रवि साहू एवं रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी रंजीत भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
खेत में जाकर दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम की खासियत यह है कि किसानों को केवल कक्षा में जानकारी देने के बजाय खेतों में ले जाकर कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य एवं नमी संरक्षण, जलवायु-स्मार्ट कृषि, फसल विविधीकरण, मिश्रित फसल, कीट एवं रोगों की पहचान, एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) तथा कम लागत वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर जानकारी दी जा रही है।
इसके साथ ही कृषि लागत कम करने, आय बढ़ाने, किसान समूह एवं FPO से जुड़ने तथा कृषि उपज के बेहतर बाजार और मूल्य प्राप्त करने के उपायों पर भी किसानों के साथ चर्चा की जा रही है।
किसानों की समस्याओं पर विशेषज्ञों ने दिए समाधान
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मौसम में हो रहे बदलाव, पानी की उपलब्धता, फसल उत्पादन, कीट एवं रोग सहित अपने खेतों से जुड़ी समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं। विशेषज्ञों ने किसानों की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाधान और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
90 दिन की कार्ययोजना तैयार करेंगे किसान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में किसानों को अपने खेतों के लिए 90-दिवसीय कार्ययोजना (90-Day Action Plan) तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसमें किसान प्रशिक्षण के बाद अपने खेतों में लागू किए जाने वाले व्यावहारिक बदलावों को चिन्हित करेंगे।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे एवं सीमांत किसानों को कम लागत, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ना है, ताकि बदलती जलवायु से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए कृषि उत्पादकता, आय और आजीविका को मजबूत किया जा सके। कार्यक्रम के माध्यम से “सशक्त किसान, जलवायु-सक्षम कृषि और समृद्ध गांव” की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
