— सेवाएं समाप्त होने से रोजगार और आर्थिक संकट का हवाला, भोपाल में आंदोलन कर रहे मोबिलाइजरों के समर्थन में उठाई आवाज
भोपाल। मध्यप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के जमीनी क्रियान्वयन में भूमिका निभाने वाले करीब 5,200 पेसा मोबिलाइजरों (प्रेरकों) की सेवा बहाली का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं पुनः प्रारंभ करने और उनके रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की है।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे पत्र में कहा कि पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में लगभग 5,200 पेसा मोबिलाइजर ग्राम स्तर पर कार्यरत रहे हैं। इनकी भूमिका ग्राम सभाओं को सक्रिय करने के साथ ही पेसा कानून और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण रही है।
पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि इस मुद्दे को लेकर 20 मई 2026 को भी शासन का ध्यान आकर्षित किया गया था और पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं निरंतर जारी रखने की मांग की गई थी। इसके बावजूद सेवाएं समाप्त किए जाने से लगभग 5,200 परिवार रोजगार और आर्थिक संकट से प्रभावित हुए हैं।
सिंघार ने यह भी कहा कि मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त होने का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पेसा कानून के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
भोपाल में आंदोलन का भी जिक्र
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया गया है कि पेसा मोबिलाइजर अपनी सेवा बहाली की मांग को लेकर भोपाल में आंदोलनरत हैं। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर समीक्षा करने की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से 5,200 पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं पुनः प्रारंभ करने तथा उनके रोजगार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
वहीं सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि पेसा मोबिलाइजरों की सेवा समाप्त होने से हजारों परिवारों के सामने रोजगार और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल निर्णय लेकर सेवाएं बहाल करने की मांग दोहराई है।

