— समय सीमा में वसूली राशि जमा न करने पर सरपंच-सचिव के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई
डिंडौरी। गांव की सड़कों पर विकास की उम्मीद लेकर बैठे ग्रामीणों के भरोसे को उस समय गहरा झटका लगा, जब ग्राम पंचायत सुंदरपुर में सड़क निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की अनियमितता उजागर हुई। जिस सड़क पर बच्चों को स्कूल जाना था और ग्रामीणों को राहत मिलनी थी, वही सड़क अब भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है।
दरअसल जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) द्वारा पारित आदेश में साफ हुआ है कि ग्राम पंचायत सुंदरपुर में सीसी रोड निर्माण के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच में सामने आया कि बिछिया मेन रोड से प्राथमिक शाला तक बनने वाली सड़क को कागजों में दो बार स्वीकृति दी गई, जबकि हकीकत में सड़क सिर्फ एक बार ही बनी।
यहीं नहीं, भर्सटोला सीसी रोड निर्माण में भी भारी गड़बड़ी सामने आई। कागजों में सड़क की लंबाई 134 मीटर दर्शाई गई, लेकिन मौके पर यह महज करीब 110 मीटर ही पाई गई। यानी विकास के नाम पर न सिर्फ पैसा खर्च दिखाया गया, बल्कि जमीन पर काम भी अधूरा छोड़ दिया गया।
जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार कुल 3 लाख 99 हजार 800 रुपये की राशि नियम विरुद्ध तरीके से निकाली गई। इस मामले में तत्कालीन सरपंच श्री सतेन्द्र धुर्वे और सचिव नारायण सिंह बघेल को जिम्मेदार पाया गया। प्रशासन ने दोनों को कई बार सुनवाई का अवसर दिया, लेकिन वे अपने बचाव में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। अंततः विहित प्राधिकारी ने दोनों पर बराबर-बराबर 1,99,900 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर राशि जमा नहीं की गई, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सचिव के मामले में तो वेतन से हर महीने 30 हजार रुपये की कटौती करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला सिर्फ पैसों की गड़बड़ी का नहीं, बल्कि उस विश्वास का है जो ग्रामीण अपने चुने हुए प्रतिनिधियों पर करते हैं। जब विकास के नाम पर ही सवाल उठने लगें, तो सबसे ज्यादा चोट आम जनता के भरोसे पर ही पड़ती है। सुंदरपुर की यह घटना अब पूरे जिले के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है कि जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।




