— 115 अधिकारियों-कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन वर्षों से लंबित, विभाग ने जारी किया सख्त स्मरण पत्र
भोपाल। मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लंबित गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) का बड़ा मामला सामने आया है। कार्यालय आयुक्त, जनजातीय कार्य मध्यप्रदेश द्वारा 27 मई 2026 को जारी स्मरण पत्र में विभाग के कुल 115 अधिकारियों-कर्मचारियों के अपूर्ण गोपनीय प्रतिवेदनों की सूची जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि विभिन्न पदों पर पदस्थ अधिकारियों के वर्षवार गोपनीय प्रतिवेदन अब तक जमा नहीं हुए हैं। इनमें कई मामलों में वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक के सीआर लंबित पाए गए हैं। विभाग ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए सभी संबंधित कार्यालयों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
— इन पदों के अधिकारी सूची में शामिल
सूची में जिला संयोजक, क्षेत्र संयोजक, विकासखंड अधिकारी, मंडल संयोजक, सहायक आयुक्त, परियोजना प्रशासक, उपयंत्री, अनुसंधान सहायक, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, प्रगति सहायक, टी.सी.पी.सी. कर्मचारी, प्रशिक्षक एवं अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
— कई जिलों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल
सूची में गुना, दमोह, सीधी, जबलपुर, बैतूल, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, धार, बालाघाट, भोपाल, इंदौर, सागर, ग्वालियर, भिण्ड, खरगोन, खंडवा, झाबुआ, विदिशा, अनूपपुर, छतरपुर, मुरैना और नरसिंहपुर सहित कई जिलों के अधिकारी-कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।
— नए नाम भी सूची में जुड़े
जारी विस्तारित सूची में अमृतलाल बारे के वर्ष 2015 से 2021 तक के गोपनीय प्रतिवेदन लंबित बताए गए हैं। वहीं रानू सुमन, देवेन्द्र कुमार कुशवाहा, रजनीश पटेल, नेहा चौहान, प्रशान्त कुमार श्रीवास्तव, माईकल बवेरिया, ए.के. द्विवेदी, विमला सरयाम, डी.एस. धुर्वे एवं रंजना धुर्वे सहित अनेक अधिकारियों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा टी.सी.पी.सी. भोपाल, भिण्ड, अशोकनगर, मंडला एवं बालाघाट में कार्यरत कर्मचारियों के भी कई वर्षों के प्रतिवेदन लंबित पाए गए हैं। अनुसंधान इकाई जबलपुर एवं इंदौर के कर्मचारियों के नाम भी सूची में शामिल हैं।
— विभाग ने दी सख्त चेतावनी
स्मरण पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर लंबित गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि निर्धारित समय सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी समयमान वेतनमान, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों से वंचित हो सकते हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की होगी।
— विभागीय हलकों में चर्चा तेज
इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन लंबित होने के बाद विभागीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि लंबे समय से लंबित सीआर के कारण विभागीय पदोन्नति, वेतनवृद्धि और सेवा रिकॉर्ड संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही थीं, जिसके बाद मुख्यालय स्तर से सख्त रुख अपनाया गया है।
