— प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जी जियोटैगिंग कर 4.45 लाख रुपये की राशि अन्य खातों में कराने का आरोप, 1.82 लाख रुपये की वसूली भी बाकी
डिंडौरी। जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत करसईसोंढा में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में वित्तीय अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी/विहित प्राधिकारी (पंचायत), जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा जारी आदेश में ग्राम रोजगार सहायक संजय कुमार संत की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।
— ये रहा पूरा मामला
जारी आदेश के अनुसार, जनपद पंचायत डिंडौरी के पत्र एवं जनपद स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पांच हितग्राहियों की नियम विरुद्ध तरीके से जियोटैगिंग कर अन्य अपात्र हितग्राहियों के खातों में कुल 4 लाख 45 हजार रुपये की राशि भुगतान कराए जाने और निर्माण कार्यों में आहरण कर वित्तीय अनियमितता किए जाने का मामला सामने आया था।
जांच में ग्राम पंचायत करसईसोंढा के हितग्राहियों पुरुषोत्तम पिता पंचम आयु 34 वर्ष, सतीश सोनवानी पिता फगुआ आयु 38 वर्ष, रामप्यारी मार्को पति फूल सिंह आयु 40 वर्ष, भगलू सिंह पिता दरबारी आयु 70 वर्ष तथा सहिया बाई पति स्व. सुखवीर आयु 60 वर्ष के नाम से राशि जारी किए जाने का उल्लेख है। आदेश में बताया गया कि कुल ₹4,45,000 की राशि फर्जी तरीके से अन्य व्यक्तियों के नाम से भुगतान कराई गई और नियम विरुद्ध जियोटैगिंग की गई।
— जिम्मेदारी तय होने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
मामले में मुख्य रूप से तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव निरंजन बघेल एवं ग्राम रोजगार सहायक संजय कुमार संत को दोषी पाया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत प्रकरण में ₹2,22,500 की देयता निर्धारित की गई थी।
आदेश के अनुसार ग्राम रोजगार सहायक संजय कुमार संत द्वारा 19 फरवरी 2026 को ₹40 हजार जनपद पंचायत डिंडौरी के खाते में जमा कराए गए। इसके बावजूद ₹1,82,500 की राशि जमा नहीं की गई।
— बार-बार अवसर के बाद भी नहीं सुधरी कार्यप्रणाली
प्राधिकरण ने आदेश में कहा है कि संजय कुमार संत को कार्यप्रणाली में सुधार, प्रधानमंत्री आवास योजना की मॉनिटरिंग एवं लक्ष्यपूर्ति के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। समय-समय पर पत्रों एवं समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्य में सुधार के निर्देश भी दिए गए, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
साथ ही, निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराने और मनरेगा योजना के निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध प्रगति असंतोषजनक पाए जाने को भी गंभीरता से लिया गया।
— संविदा सेवा पर लगा विराम
आदेश में कहा गया कि संजय कुमार संत द्वारा पद पर रहते हुए ₹1,82,500 की वित्तीय अनियमितता के संबंध में उदासीनता बरती गई। पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और मनरेगा योजना के निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध प्रगति असंतोषजनक रही। इन परिस्थितियों को देखते हुए मध्यप्रदेश ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत उनकी संविदा सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।
— रोजगार सहायक संजय संत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं, पूरी कार्रवाई को लेकर संबंधित ग्राम रोजगार सहायक संजय कुमार संत ने अपना पक्ष रखते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अंतिम चेतावनी का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। संजय संत के अनुसार, पिछले करीब छह माह से उन्हें वेतन का भुगतान नहीं हुआ है, जिसके कारण निर्धारित वसूली राशि जमा करने में परेशानी हुई।
संजय संत का यह भी कहना है कि उक्त मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के विरुद्ध भी कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन उनके अनुसार सचिव पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और उनके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अंतिम चेतावनी का पत्र दिया गया है तो उसकी जानकारी और अभिलेख भी सामने रखे जाने चाहिए। रोजगार सहायक ने कार्रवाई की प्रक्रिया और अपनी संविदा सेवा समाप्त किए जाने को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।



