Big Breaking : अमृत 2.0 में लापरवाही पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, 10 अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस….

Rathore Ramshay Mardan
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निर्माण गुणवत्ता, सीवर लाइन, एसटीपी और जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमण के मामले में कार्रवाई, जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मांगा 7 दिन में जवाब

डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी में अमृत 2.0 योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सीवर लाइन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में नाले के पानी की स्थिति तथा जलाशय, कैचमेंट एरिया, नहर और वेस्ट वियर क्षेत्र में अतिक्रमण के मामले में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर कार्यालय ने अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 10 अधिकारियों-कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। सभी को सात दिवस के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मामला अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत नगर परिषद डिंडौरी क्षेत्र में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों से जुड़ा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में निर्माण कार्यों, जलाशय संरक्षण और अतिक्रमण से जुड़े कई बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

स्वीकृत डिजाइन और लेआउट से विपरीत निर्माण पर सवाल

जांच रिपोर्ट के अनुसार अमृत 2.0 के तहत कराए जा रहे कार्यों में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। नोटिसों में स्वीकृत डिजाइन एवं लेआउट के विपरीत तालाब के भीतर सीवर लाइन, मेनहोल और पाइपलाइन का निर्माण कराए जाने का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा निर्माण कार्यों की समुचित निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और निरीक्षण में लापरवाही बरतने के साथ आवश्यक तकनीकी स्वीकृति और एनओसी से जुड़े नियमों के पालन में भी कमी का उल्लेख किया गया है। कलेक्टर कार्यालय ने इन परिस्थितियों को शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही मानते हुए संबंधितों से जवाब मांगा है।

जलाशय, नहर और वेस्ट वियर क्षेत्र में अतिक्रमण

जांच के दौरान जलाशय, कैचमेंट एरिया, नहर और वेस्ट वियर क्षेत्र में कृषि फार्म, मकान, बाड़ी तथा निस्तार के लिए बनाई गई विभिन्न संरचनाओं के रूप में अतिक्रमण पाए जाने की बात नोटिसों में सामने आई है। कुछ मामलों में संबंधित भूमि और खसरा नंबरों का भी उल्लेख किया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण की स्थिति सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रभावी निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। इससे जलाशय संरक्षण और योजना के निर्धारित उद्देश्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की स्थिति बनी।

इन 10 अधिकारियों-कर्मचारियों से मांगा जवाब

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी नोटिसों में गोपाल गुप्ता, परियोजना प्रबंधक, म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर; बलराम पूर्वे, उपयंत्री, म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर; एस.के. शर्मा, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग डिंडौरी; आर.पी. मांझी, तत्कालीन तहसीलदार डिंडौरी तथा अभय कुमार जैन, सहायक परियोजना प्रबंधक, म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर से जवाब मांगा गया है।

इसके अलावा बलिराम भवेदी, पटवारी; विहान शुक्ला, उपयंत्री, जल संसाधन विभाग; शिवराज बघेल, उपयंत्री, नगर परिषद डिंडौरी; अमित तिवारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी डिंडौरी तथा हेमंत उइके, राजस्व निरीक्षक डिंडौरी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

पटवारी की रिपोर्ट पर भी सवाल

पटवारी बलिराम भवेदी को जारी नोटिस में जांच के दौरान प्रस्तुत प्रतिवेदन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस के अनुसार कुछ स्थानों पर जलाशय क्षेत्र, कैचमेंट एरिया, नहर और वेस्ट वियर में अतिक्रमण पाए जाने के बावजूद प्रतिवेदन में अतिक्रमण नहीं पाए जाने का उल्लेख किया गया। कलेक्टर कार्यालय ने इसे प्रथम दृष्टया दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और अपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का मामला माना है।

CMO और उपयंत्रियों की जिम्मेदारी भी जांच के घेरे में

नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमित तिवारी और उपयंत्री शिवराज बघेल को जारी नोटिस में अमृत 2.0 के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जलाशय संरक्षण, अतिक्रमण तथा संबंधित कार्यों की निगरानी को लेकर जवाब मांगा गया है।

वहीं जल संसाधन विभाग के उपयंत्री विहान शुक्ला और तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा से जलाशय, नहर एवं वेस्ट वियर क्षेत्र में अतिक्रमण तथा निर्माण कार्यों की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

7 दिन में देना होगा जवाब

कलेक्टर कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सात दिवस के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में संबंधितों के विरुद्ध एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

अमृत 2.0 योजना जैसे महत्वपूर्ण शहरी विकास प्रोजेक्ट में निर्माण गुणवत्ता, जलाशय संरक्षण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में 10 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। अब मामले में संबंधितों के जवाब के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

 

 

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