— जांच समिति में 4 अधिकारी शामिल – डिप्टी कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी, लेखा अधिकारी और सहायक परियोजना अधिकारी
डिंडौरी। जिले में पिछले तीन वर्षों से शासन के आदेशों और निर्देशों के बावजूद पन्द्रहवें वित्त और मनरेगा निधि का सही उपयोग न होने की शिकायतें जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची हैं। बता दें कि यह मामला उन हजारों ग्रामीणों की उम्मीदों से जुड़ा है, जिनका हक इन निधियों में छिपा है। शिकायतों में आरोप है कि जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली निधियों का अनुचित खर्च किया गया। इसमें शहपुरा, चौरा (दुल्लोपुर) एवं कछारी, करंजिया, खारीडीह, अमरपुर, कमकोमोहनिया और रामगुडा (दुनिया-बघाड) ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
कलेक्टर डिंडौरी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए इस मामले की गहन जांच के लिए समिति गठित की है। बता दें कि जांच समिति में शामिल हैं प्रियांशी जैन, डिप्टी कलेक्टर डिंडौरी, राहुल उइके, अनुविभागीय अधिकारी नर्मदा घाटी परियोजना डिंडौरी, प्रफुल्ल बिसेन, लेखा अधिकारी कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डिंडौरी और रामजीवन वर्मा, सहायक परियोजना जिला पंचायत डिंडौरी। समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सात दिनों के भीतर अपना विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें, ताकि निधियों के सही उपयोग और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा और पन्द्रहवें वित्त की निधियां उनके जीवन और रोज़गार से जुड़ी हैं, और इनके दुरुपयोग से उनका हक छिन सकता है। प्रशासन की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि डिंडौरी में विकास कार्य और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी जा रही है। इस तरह की जांच से केवल दुरुपयोग रोका नहीं जाएगा बल्कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए शासन के निर्देशों का सही पालन भी सुनिश्चित होगा। ग्रामीण समुदाय ने उम्मीद जताई है कि जांच समिति निष्पक्ष होकर उनके हक की रक्षा करेगी और निधियों का हर पैसा सही दिशा में जाएगा। डिंडौरी कलेक्टर कार्यालय की यह पहल ग्रामीणों की उम्मीदों और अधिकारों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता का परिचायक है और यह दर्शाती है कि जिले में विकास कार्य और पारदर्शिता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


