भोपाल। कार्यालय आयुक्त कोष एवं लेखा मध्यप्रदेश ने स्टायपेंड श्रेणी के शासकीय सेवकों के वेतन निर्धारण प्रकरणों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा शशि मिश्रा द्वारा सभी संभागीय संयुक्त संचालकों (भोपाल, उज्जैन, इंदौर एवं जबलपुर) को पत्र प्रेषित किया गया है।
पत्र में उल्लेख है कि मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग के दिनांक 12 दिसंबर 2019 के आदेश और 22 फरवरी 2020 को प्रकाशित राजपत्र के अनुसार तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के उन पदों पर नियुक्त शासकीय सेवकों, जिनका चयन मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा नहीं किया जाता, को तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किया जाता है।
इन कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान प्रथम वर्ष में पद के मूल वेतन का 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत एवं तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत राशि स्टायपेंड के रूप में भुगतान की जा रही है। परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के पश्चात मूल वेतन 100 प्रतिशत देय होने पर IFMIS प्रणाली में वेतन निर्धारण की प्रक्रिया की जाती है।
कार्यालय द्वारा जानकारी दी गई है कि IFMIS में सामान्य पे-फिक्सेशन स्क्रीन पर टेस्ट लॉग-इन के माध्यम से वेतन निर्धारण की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। सभी संभागीय कार्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे उपलब्ध सुविधा के अनुसार परीक्षण कर तीन दिवस के भीतर अपना प्रतिवेदन आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय को प्रेषित करें। यह निर्देश राज्य के हजारों स्टायपेंड श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को सुचारु एवं स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
