भोपाल। ट्रायवल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की है। यह याचिका एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डीके सिंगौर के नेतृत्व में हजारों शिक्षकों की आजीवन सदस्यता के साथ प्रस्तुत की गई है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, याचिका में कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के निर्धारित मापदंडों के आधार पर की गई थी और वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता लागू नहीं थी। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में टीईटी परीक्षा में शामिल होने के लिए 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य कर दिए गए हैं, जबकि पूर्व में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
एसोसिएशन ने मांग की है कि जिन शिक्षकों के अंक 50 प्रतिशत से कम हैं, उन्हें श्रेणी सुधार के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। साथ ही यह भी बताया गया कि अधिकांश शिक्षकों ने बैंक से ऋण लिया हुआ है, ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए न्याय किया जाना आवश्यक है।
याचिका में वर्ष 2017 के न्यायिक निर्णय को नौ वर्ष बाद लागू किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है और मांग की गई है कि शिक्षकों को भी उतनी ही अवधि का समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर 27488/2026, केस नंबर RP (C) के तहत दायर इस रिव्यू पिटीशन में अंजुमन इंशात ए तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से छूट प्रदान की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक एवं गुरुजी संवर्ग के शिक्षकों को सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों को पूरा करने के बाद ही वर्ष 2018 में प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक पदों पर नियुक्ति दी गई थी। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों के हित में न्यायसंगत निर्णय लेगा।
