— पड़रियाकला में 19.07 लाख और विक्रमपुर में 13.66 लाख की अनियमितता
डिंडौरी। जिला पंचायत डिण्डौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी (पंचायत) द्वारा ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग प्रकरणों में कुल 32 लाख 74 हजार 166 रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत की गई है।
पहले प्रकरण में ग्राम पंचायत पड़रियाकला में मनरेगा योजना के तहत नाला विस्तारीकरण कार्य में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में सामने आया कि वर्षा ऋतु के दौरान मजदूरों के नाम पर कार्य दर्शाकर राशि आहरित की गई, जबकि स्थल निरीक्षण में उक्त कार्य नहीं पाया गया। मस्टररोल के आधार पर लगभग 4 लाख 46 हजार 776 रुपये का खर्च दर्शाया गया, जिसका मूल्यांकन भी संदिग्ध पाया गया। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 14 लाख 60 हजार 872 रुपये का व्यय दिखाया गया, लेकिन उसके संबंध में आवश्यक अभिलेख जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर सरपंच रायसिंह परस्ते और सचिव रमेश सिंह वालरे से 7-7 लाख 30 हजार 436 रुपये, उपयंत्री कमलेश धूमकेती तथा ग्राम रोजगार सहायक सज्जनदास खाण्डे से 2-2 लाख 23 हजार 388 रुपये की वसूली निर्धारित की गई है। कुल 19 लाख 7 हजार 648 रुपये की राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरे प्रकरण में ग्राम पंचायत विक्रमपुर में 15वें वित्त आयोग एवं अन्य मदों की राशि के उपयोग में नियमों के विपरीत व्यय किए जाने का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान शासन द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च की गई। वर्ष 2022-23 में 1 लाख 85 हजार 262 रुपये, वर्ष 2023-24 में 5 लाख 61 हजार 774 रुपये तथा वर्ष 2024-25 में 6 लाख 19 हजार 482 रुपये का अधिक व्यय पाया गया। इस प्रकार कुल 13 लाख 66 हजार 518 रुपये की राशि अनियमित रूप से खर्च होना सामने आया। जांच के आधार पर सरपंच रामनारायण धुर्वे और तत्कालीन सचिव तीरथ प्रसाद गोसाई से 6-6 लाख 83 हजार 259 रुपये की वसूली के आदेश दिए गए हैं।
दोनों मामलों में संबंधितों को कई बार सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन वे अपने पक्ष में ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि 7 दिनों के भीतर निर्धारित राशि जमा नहीं की जाती है, तो मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 एवं म.प्र. भू-राजस्व संहिता के तहत वसूली की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इन कार्रवाइयों से जिले में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं पर प्रशासन की सख्ती स्पष्ट दिखाई दे रही है।




