— करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित होने का दावा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र
भोपाल। मध्यप्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से गंभीरता से विचार करने की मांग की है। सिंघार ने 1 सितंबर 2026 को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को अलग-अलग पत्र भेजकर शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र आहूत किए जाने का अनुरोध किया है।
राज्यपाल को भेजे पत्र में उमंग सिंघार ने कहा है कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के संबंध में TET की अनिवार्यता के कारण उनकी सेवा-निरंतरता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा-लाभों को लेकर विषम परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं। इससे लगभग 1.50 लाख शिक्षक एवं उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को उनके हितों को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सिंघार ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 एवं 29 मई 2026 के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में TET से संबंधित विषय वर्तमान में महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है। इसमें 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट प्रदान किए जाने तथा उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण का प्रस्ताव पारित किए जाने की बात कही गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब तमिलनाडु विधानसभा द्वारा शिक्षकों के हितों को लेकर इस प्रकार का प्रस्ताव पारित किया जा सकता है, तो मध्यप्रदेश में भी शिक्षकों की समस्याओं पर विधानसभा के माध्यम से चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि मध्यप्रदेश के शिक्षकों के हितों को दृष्टिगत रखते हुए विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए, ताकि TET की अनिवार्यता से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा कर शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जा सके।

