डिंडौरी। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष राम कुमार गर्ग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए जल्दबाजी में जारी किए गए आदेशों से सरकार खुद ही उलझती नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सभी जिलों और ब्लॉकों में संगठन का गठन युद्धस्तर पर किया जा रहा है। शिक्षकों ने अपनी दो प्रमुख मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं, जिनमें टीईटी परीक्षा को रद्द करना और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देना शामिल है।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि अधिकारियों द्वारा जारी पत्र में वर्ष 2011 के पूर्व नियुक्त ऐसे शिक्षकों की सूची मांगी गई है, जिन्होंने पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। इस पर मोर्चा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सभी शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के नियमों और मापदंडों के अनुसार ही हुई है। वर्ष 1998-99 में शिक्षाकर्मियों की साक्षात्कार परीक्षा के माध्यम से भर्ती हुई, जबकि 2001-03 में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर की गई। वहीं 2005 से 2008 के बीच शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित हुई थी।
गर्ग ने कहा कि सरकार पिछले 25 वर्षों से इन शिक्षकों की सेवाएं ले रही है और कई शिक्षकों को राष्ट्रपति, राज्यपाल सहित अन्य पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 जुलाई 2018 को इन शिक्षकों को उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई थी।
मोर्चा का कहना है कि यदि सरकार 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों से टीईटी परीक्षा दिलाने का निर्णय लेती है, तो उन्हें प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता के साथ पुरानी पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ देना होगा। वहीं यदि सरकार ऐसा करने में असमर्थ है, तो 1 जुलाई 2018 की नियुक्ति के आधार पर इन शिक्षकों से परीक्षा नहीं ली जा सकती। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन के तहत 8 अप्रैल को जिलों और 11 अप्रैल को ब्लॉकों में प्रदर्शन किए जाएंगे, जबकि 18 अप्रैल को भोपाल में “शिक्षक सम्मान बचाओ अनुरोध रैली” आयोजित कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।
