डिंडौरी। एक ओर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ग्राम पंचायतों को पांचवां राज्य वित्त आयोग से करोड़ों रुपए की राशि उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार अधिकारी ही इन योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे हैं।

दरअसल ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत चिचरिंगपुर का है, जहां पंचायत द्वारा 2 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 60 मीटर सीसी सड़क का निर्माण मोहगांव में ललन के घर से मल्लू के घर तक कराया गया। आरोप है कि निर्माण कार्य में सरपंच और सचिव द्वारा तय तकनीकी मापदंडों की पूरी तरह अनदेखी की गई। सड़क बिना बेस लेयर, बिना प्लास्टिक शीट, और मिट्टी युक्त गिट्टी और रेत से बनाई गई है। इससे सड़क की मजबूती और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यह सड़क कुछ महीनों में ही जर्जर हो जाएगी।

— बिना जीएसटी बिल के किया गया लाखों का भुगतान
बता दें कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की खरीद में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। सरपंच और सचिव द्वारा अपने चहेते सप्लायर को लाभ पहुंचाने के लिए बिना जीएसटी वाले साधारण कागज़ के बिलों पर लगभग 1 लाख 78 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया। जबकि पंचायत को पांचवें वित्त आयोग की गाइडलाइन के तहत सही बिल, जीएसटी रसीद, सामग्री का विवरण, मात्रा और मूल्य के आधार पर भुगतान करना चाहिए था। बिना जीएसटी बिल और मानक दस्तावेजों के भुगतान करना वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, जो भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद अधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाते हैं और क्या वाकई विकास निधि का दुरुपयोग रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
इनका कहना है”
आपके माध्यम से मामला मेरे संज्ञान में आया है , जांच कराई जाएगी।
दिव्यांशु चौधरी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी।





