Dindori News : धान की फसल पर रस चूसक कीटों का हमला, खेतों का वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण…..

Rathore Ramshay Mardan
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व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर के प्रकोप से पीली पड़कर सूख रही धान की फसल, किसानों को समय पर नियंत्रण की सलाह

डिंडौरी। जिले में इन दिनों धान की फसल पर व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर सहित अन्य रस चूसक कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। कई क्षेत्रों में कीटों के अधिक प्रकोप के कारण धान के पौधे पीले पड़ने और सूखने की समस्या सामने आ रही है। स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी के वैज्ञानिकों के दल ने जिले के विभिन्न ग्रामों में किसानों के खेतों का निरीक्षण कर फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

वैज्ञानिक दल ने कोकोमाटा, बिलासर, पड़रिया, धनौली, धनुआसागर सहित अन्य ग्रामों में खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान धान की फसल में व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर के साथ अन्य रस चूसक कीटों का प्रकोप पाया गया।

वैज्ञानिकों के अनुसार व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर सहित रस चूसक कीट धान के पौधों के तने एवं पत्तियों से रस चूसते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है। प्रकोप बढ़ने पर पौधे पीले पड़ने लगते हैं और पत्तियां सूख सकती हैं। अधिक संख्या में कीट होने पर खेत में प्रभावित स्थान झुलसे हुए दिखाई दे सकते हैं।

किसानों को नियमित निगरानी की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि धान के खेतों में तने के निचले हिस्से और पौधों के बीच नियमित रूप से कीटों की निगरानी करें। खेत में अनावश्यक रूप से नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल न करें तथा खेत में अत्यधिक पानी भरकर न रखें। कीटों का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर ही कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसा के अनुसार पंजीकृत कीटनाशक का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर के साथ ब्राउन प्लांट हॉपर, लीफ फोल्डर एवं अन्य कीटों की भी नियमित निगरानी करने को कहा है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि किसी भी कीट या रोग की सही पहचान के बाद ही उसके नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं।

नियंत्रण के लिए इन विकल्पों की दी गई जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार वर्तमान में धान की फसल में व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर की समस्या प्रमुख रूप से सामने आ रही है। रासायनिक नियंत्रण के लिए दिए गए विकल्पों में से किसी एक कीटनाशक की अनुशंसित मात्रा को 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है—

इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल — 60 मिली प्रति एकड़।

थायोमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी — 80 ग्राम प्रति एकड़।

पायमेट्रोजिन 50% डब्ल्यूजी — 120 ग्राम प्रति एकड़।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि कीटनाशकों का उपयोग लेबल/पंजीकृत अनुशंसा और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें तथा एक साथ कई कीटनाशकों का अनावश्यक मिश्रण न करें।

असामान्य प्रकोप की सूचना देने की अपील

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि खेत में किसी भी प्रकार के रोग अथवा कीट का असामान्य प्रकोप दिखाई देने पर उसकी फोटो सहित जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को दें। इससे फसल में समस्या की समय पर पहचान कर किसानों को उचित तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी।

 

 

 

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