—बीईओ व परियोजना कार्यालय अमरपुर में चपरासी बन बैठे हैं क्लर्क — जिम्मेदार अधिकारी मौन
डिंडौरी। जिले के शिक्षा विभाग और परियोजना कार्यालयों में कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थिति यह है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें माली, अग्निशमन कर्मचारी, चपरासी या अनुकंपा नियुक्ति चपरासी के रूप में पदस्थ किया गया था, अब क्लर्क, कैशियर, अकाउंटेंट और शाखा इंचार्ज जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह गड़बड़ी सिर्फ एक-दो कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के सभी सात ब्लॉकों में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। सबसे बड़ा उदाहरण बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) और परियोजना कार्यालय अमरपुर का है, जहां एक चपरासी लंबे समय से क्लर्क का कार्य देख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, लिपिकों की कमी के चलते सातों ब्लॉकों में 56 कर्मचारियों को अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत सहायक, क्लर्क या कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों पर हैं। परंतु निगरानी के अभाव में कई कर्मचारी अपनी मूल नियुक्ति से हटकर अन्य पदों पर काम कर रहे हैं।
कार्यालयों में इन कर्मचारियों की उपस्थिति अनियमित रहती है, और कई बार वे बिना अनुमति के कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाते हैं। इसके बावजूद उनके नाम से वेतन निर्माण और भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है।
ग्रामीण सूत्रों का कहना है कि उच्च अधिकारियों की अनदेखी और निगरानी तंत्र की कमजोरी के कारण यह व्यवस्था वर्षों से चल रही है। अब हालत यह हो गई है कि ये कर्मचारी स्वयं को स्थायी रूप से इन पदों का अधिकारी मानने लगे हैं। जनचर्चा है कि यदि प्रशासन ने इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो विभागीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे।





