डिंडौरी। विकासखंड शहपुरा के ग्राम पंचायत बरगांव में स्थित जनजातीय कल्याण केंद्र प्रांगण और नर्मदांचल विद्यापीठ शिक्षक भवन, सोलर पैनल एवं वार्षिक प्रतिवेदन का भव्य लोकार्पण समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर, राजकुमार मटोले, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी, राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और पर्यटन मंत्री प्रीतम लोधी सहित अनेक वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे।
समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा लोकार्पण से हुई। तत्पश्चात भारत माता, वीरांगना रानी दुर्गावती और भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित और माल्यार्पण किया गया। नर्मदांचल विद्यापीठ की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना और लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि विद्यालय के बच्चों ने राजकीय खेल मल्लखंभ का शानदार प्रदर्शन किया।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि जनजातीय कल्याण केंद्र में गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक और सांस्कारिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा समाज सेवा ही राष्ट्र सेवा है। अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को शिक्षित एवं संस्कारित बनाना ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन का मूल उद्देश्य है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन का स्मरण करते हुए कहा, “आओ दीप वहां जलाएं, जहां आज भी अंधेरा है।” इस केंद्र के माध्यम से वंचित वर्ग के जीवन में उजाला फैल रहा है। सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने आदर्श ग्राम निर्माण और “मेरा गांव, स्वस्थ गांव” योजना पर जोर दिया। उन्होंने 100 ग्रामों को रोगमुक्त, व्यसनमुक्त, विवादमुक्त एवं क्षुधामुक्त बनाने का लक्ष्य साझा किया और सामाजिक समरसता एवं स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
राजकुमार मटोले ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना, उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण माहौल तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर, नेतृत्व क्षमता से संपन्न युवा तैयार करना हमारा लक्ष्य है, जो समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित हों। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय विधायक और सांसद, जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। समारोह ने शिक्षा, संस्कृति और खेल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का जीवंत उदाहरण पेश किया।
