डिंडौरी। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर जिले में शिक्षकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। उत्कृष्ट विद्यालय डिंडौरी के मैदान में आयोजित विशाल महासभा में जिले के सभी विकासखंडों से पहुंचे हजारों शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। संभागीय अध्यक्ष राम कुमार गर्ग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह महासभा शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई का बड़ा मंच बनी।

सभा के दौरान शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा को “काला कानून” बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई अनिवार्यताएं थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से संसद में अध्यादेश लाकर इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग की। शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांगों में प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता प्रदान करना शामिल है, ताकि सेवा अवधि का सही लाभ मिल सके। महासभा में वक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

महासभा के बाद शिक्षकों ने शहर में विशाल रैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली के दौरान “काला कानून वापस लो” और “शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा। इसके बाद शिक्षकों ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षामंत्री और राज्य के शिक्षामंत्री के नाम कलेक्टर डिंडौरी को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे।

इस आंदोलन में जिला संयोजक सुशील कुमार नागेश्वर सहित देवेंद्र दीक्षित, सनत तिवारी, आनंद उइके, खेमचंद पड़वार, तरुण ठाकुर, जीवन मरावी, मधु दीप उपाध्याय, बीएल साहू, कमलेश गुप्ता, भारती मरावी, फिरोजा बेगम, इनायत अली सैयद समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों की एकजुटता और आक्रोश को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है।
