— तीन बार जगह अब एक बार होगा सोनोग्राफी, गर्भवती महिलाएं परेशान
डिंडौरी। जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते और मरीजों के साथ व्यवहार भी संतोषजनक नहीं है। इसके अलावा साफ-सफाई और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं में भी खामियां लगातार उजागर हो रही हैं।
इसी बीच अब गर्भवती महिलाओं की जांच को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पहले जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की तीन चरणों में सोनोग्राफी की जाती थी—पहली 3 माह, दूसरी 6 माह और तीसरी 9वें महीने में—ताकि प्रसव से पहले किसी भी प्रकार की जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके।
लेकिन अब अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों द्वारा यह कहकर सोनोग्राफी करने से मना किया जा रहा है कि नियम बदल गए हैं और अब केवल एक बार ही सोनोग्राफी की जाएगी। इतना ही नहीं, कई मामलों में गर्भवती महिलाओं को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि यदि जरूरी हो तो वे बाहर निजी सेंटर में जाकर सोनोग्राफी करा लें।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं को पहले 9वें महीने में सोनोग्राफी के लिए बुलाया गया था, उन्हें अब यह कहकर मना किया जा रहा है कि उनकी जांच पहले ही हो चुकी है। इस कारण गर्भवती महिलाओं में चिंता का माहौल है, क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उनकी डिलीवरी सामान्य होगी या किसी प्रकार की जटिलता हो सकती है। इससे प्रसव के समय जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले को लेकर जब जिला अस्पताल के सीएमएचओ मनोज पांडे से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय आरटीआई लगाने की सलाह दे दी। उनके इस जवाब ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं स्थानीय महिलाओं का कहना है कि महिलाओं जैसे संवेदनशील वर्ग के साथ इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है और प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।
