Dindori News : अस्पताल की बदहाल व्यवस्था उजागर ! डॉक्टर गायब, मरीज घंटों इंतजार को मजबूर….

Rathore Ramshay Mardan
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ओपीडी समय सिर्फ कागजों में सीमित, दूर-दराज से आए मरीज परेशान ,कार्रवाई की मांग तेज

 

डिंडौरी। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को घंटों तक पर्ची लेकर डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी डॉक्टर ओपीडी में नहीं पहुंचते। इससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 

जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। मरीजों का आरोप है कि वे सुबह से ही अस्पताल पहुंचकर पंजीयन कराते हैं और लंबी कतार में बैठते हैं, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बावजूद डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं रहता।

 

— दूर-दराज से आने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान

 

जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद लोगों की होती है। मरीजों का कहना है कि गांव से अस्पताल आने में उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता है, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उनका पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। कई मरीजों की हालत गंभीर होने के बावजूद उन्हें बिना इलाज के ही इंतजार करना पड़ता है।

 

— डॉक्टरों की अनुपस्थिति से चरमराई व्यवस्था

 

अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित अनुपस्थिति के कारण ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। मरीज पर्ची हाथ में लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं होता। इससे मरीजों को शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलना पड़ रहा है, वहीं अस्पताल की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल

 

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस गंभीर समस्या की ओर न तो प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि। आरोप है कि नेता आपसी राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है।

 

— निजी अस्पतालों का लेना पड़ रहा सहारा

 

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन जाती है, क्योंकि निजी अस्पतालों का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं होता।

 

जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

अस्पताल की इस बदहाल स्थिति को लेकर आम जनता में गहरा आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके।

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