Dindori News : सरकारी डॉक्टर पर निजी इलाज के नाम पर ₹3,500 लेने का आरोप, कमिश्नर से निष्पक्ष जांच की मांग….

Rathore Ramshay Mardan
3 Min Read

आयुष्मान कार्ड लेने के बाद भी नकद राशि वसूलने की शिकायत, कमिश्नर से निष्पक्ष जांच की मांग

 

मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा में पदस्थ चिकित्सक डॉ. रत्नेश कुमार द्विवेदी के खिलाफ मरीज से निजी तौर पर इलाज करने और उपचार के नाम पर ₹3,500 नकद लेने का गंभीर आरोप सामने आया है। दरअसल ग्राम बरखेड़ा निवासी अमरती बाई उरैती ने इस संबंध में जबलपुर संभाग के कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

 

शिकायत के अनुसार अमरती बाई 3 अगस्त 2026 को बुखार और चक्कर की शिकायत लेकर अपने पति के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा पहुंची थीं। आरोप है कि जांच के बाद डॉक्टर ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए तत्काल खून चढ़ाने की जरूरत बताई। शिकायतकर्ता का दावा है कि डॉक्टर ने निजी तौर पर इलाज कराने पर करीब ₹18 हजार खर्च होने की बात कही, जबकि सरकारी अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराने के लिए ₹3,500 देने की बात कही गई।

 

महिला का आरोप है कि इसके बाद डॉक्टर ने उसका और उसके पति का आयुष्मान कार्ड भी लिया और अपने सरकारी कमरे में ही उपचार किया। शिकायत में कहा गया है कि उपचार के दौरान उसे खून की बोतल और दूसरी बोतल चढ़ाई गई और कुछ दवाएं दी गईं। शाम को उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के लिए भेजा गया।

 

शिकायतकर्ता के मुताबिक अस्पताल पहुंचने पर वार्ड में जगह नहीं होने की बात कही गई। आरोप है कि वार्ड बॉय ने बताया कि डॉक्टर द्वारा भेजे गए मरीजों से कमरा भरा हुआ है और यदि चाहें तो बरामदे में दरी डालकर रात गुजार सकती हैं। इसके बाद महिला अपने पति के साथ रात में ही घर लौट गई।

 

इलाज के बाद तबीयत बिगड़ने का दावा

 

महिला ने शिकायत में दावा किया है कि इलाज कराने के बाद उसकी तबीयत में सुधार होने के बजाय लगातार गिरावट आती गई। जब उसके पति ने डॉक्टर को इसकी जानकारी दी तो कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। महिला ने इलाज से संबंधित पर्ची और ₹200 के स्टांप पर शपथ पत्र भी शिकायत के साथ संलग्न किया है।

 

दूसरे जिले की टीम से जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर से बाहर के अधिकारियों की जांच टीम गठित करने की मांग की है। उसने दूसरे जिले के एसडीएम, एसपी और कलेक्टर स्तर के अधिकारियों से जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब शिकायत पर प्रशासनिक स्तर से जांच होती है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर है।

 


Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *