Dindori News : भूमि विवाद ने छीना आत्मसम्मान, न्याय की आस में दंडवत होते जनसुनवाई पहुंचा किसान… क्या पूरा मामला…

Rathore Ramshay Mardan
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— आख़िर ऐसा क्या हुआ कि किसान को यह कदम उठाना पड़ा?

डिंडौरी। न्याय की आस जब बार-बार टूटने लगे, तो इंसान अपने आत्मसम्मान तक को दांव पर लगाने को मजबूर हो जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य मंगलवार को डिण्डौरी में आयोजित जनसुनवाई में देखने को मिला, जब ग्राम चटुवा के किसान अपनी ही जमीन बचाने की गुहार लेकर अधिकारियों के सामने दंडवत होकर लेट गए। यह दृश्य न सिर्फ एक भूमि विवाद की कहानी कह रहा था, बल्कि ग्रामीण व्यवस्था में भरोसे के टूटने का भी प्रतीक बन गया।

शिकायती पत्र के मुताबिक पीड़ित ग्रामीण उमेश्वर, बलदाऊ और देवकरण का कहना है कि वर्षों से जिस जमीन पर वे खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं, उसी भूमि को लेकर आज उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने पटवारी हल्का नंबर 61 आसुतोष परस्ते पर अनावेदक चंदन सिंह से सांठ-गांठ कर फर्जी पंचनामा और भ्रामक जांच प्रतिवेदन तैयार करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार जून 2025 में खसरा नंबर 829/1, 315, 314 और 313 में नक्शा तमील के नाम पर तहसील कार्यालय में उन्हें गुमराह किया गया और बिना सूचना दिए जांच प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने खसरा नंबर 313, 314, 315, 483, 485 और 579, कुल लगभग 0.90 हेक्टेयर भूमि के सीमांकन के लिए 3 जून से 15 जून के बीच ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी सीमांकन नहीं किया गया। इसके उलट उन्हें दबंगई, धमकी और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जानबूझकर सीमांकन लंबित रखकर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।

पीड़ितों ने यह भी बताया कि खसरा नंबर 829 में लगभग पांच से छह वर्ष पूर्व नहर (कैनाल) का निर्माण किया गया था, लेकिन आज तक उसका नक्शा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इसके बावजूद पटवारी द्वारा कथित तौर पर नहर को नजरअंदाज कर गलत प्रतिवेदन तैयार किया गया और धारा 250 के तहत तहसील न्यायालय से पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जा दिलाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन का स्वरूप बदला जा चुका है, तब कागजों में सच्चाई छुपाना उनके लिए समझ से परे है।

ग्रामीणों के अनुसार इस भूमि से संबंधित मामला व्यवहार न्यायालय वर्ग-01 डिण्डौरी में प्रकरण क्रमांक 129-A/2019 के रूप में पहले से विचाराधीन है। इसके बावजूद जून माह में तहसील न्यायालय द्वारा कब्जा दिलाया जाना उन्हें न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करने को मजबूर कर रहा है। उनका कहना है कि अदालत में मामला लंबित होने के बाद भी की गई कार्रवाई ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया।

पीड़ितों ने आरोप लगाया कि खसरा नंबर 313, 314 और 315 में रास्ता और पक्का नक्शा बनवाने के लिए पटवारी द्वारा अपने ही सगे संबंधियों को पंच बनाकर फर्जी पंचनामा तैयार किया गया, जबकि भूमि स्वामियों की कोई सहमति नहीं ली गई। तहसीलदार के समक्ष अपनी आपत्ति रखने के बावजूद उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया, जिससे उनका भरोसा प्रशासन पर और कमजोर हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता निकालने के नियम स्पष्ट हैं, इसके बावजूद केवल उनकी उपजाऊ कृषि भूमि से जबरन रास्ता निकाला जा रहा है, जबकि अनावेदक की वैकल्पिक भूमि शासकीय क्षेत्र और मिडिल स्कूल के पास स्थित है। उनका आरोप है कि गलत प्रतिवेदन के आधार पर उनकी फसल और जमीन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

जनसुनवाई में दंडवत होते हुए किसान की आंखों में आंसू थे। उनका कहना था कि वे किसान हैं, कानून की भाषा नहीं जानते, लेकिन अपनी जमीन बचाने का हक जरूर जानते हैं। वहीं मामले की की गंभीरता को समझते हुए जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी के मौके तहसीलदार को बुलाकर किसान के सामने ही प्रकरण का निष्पक्ष जांच कर निराकरण के निर्देश दिए। वहीं अब देखना यह है क्या किसान के समस्या का समाधान हो पाएगा या इसी तरह सिस्टम की लापरवाही का शिकार होता रहेगा।

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