— अमरपुर जनपद पंचायत में फर्जी बिल–बाउचर का आरोप, अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
डिंडौरी। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की अमरपुर जनपद पंचायत में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की हेराफेरी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड–03 दिनेश कुमार तेकाम पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिल–बाउचर लगाकर जनपद निधि से बड़े पैमाने पर सरकारी धन का आहरण किया। यह कथित अनियमितता वर्ष 2017–18 से 2025–26 के बीच की बताई जा रही है, जिसमें जनपद पंचायत के खाते से सीधे संबंधित कर्मचारी के निजी खाते में भुगतान किए जाने के दस्तावेज सामने आए हैं।

मामले के उजागर होने के बाद जनपद पंचायत अमरपुर में पदस्थ रहे तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी आधार सिंह कुशराम तथा वर्तमान सीईओ लोकेश नारनौरे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि बाबू द्वारा स्वयं के खाते में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए बिल–बाउचर को अधिकारियों ने सत्यापित कर भुगतान की अनुमति दी, जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी अपने निजी खाते में किसी भी प्रकार का भुगतान आहरित नहीं कर सकता। इसके बावजूद लंबे समय तक ऐसे भुगतानों पर रोक न लगना प्रशासनिक लापरवाही या संरक्षण की ओर इशारा करता है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार जनपद पंचायत की राशि ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होने के बजाय चौक कार्यक्रम, चाय–नाश्ता, टेंट सहित अन्य व्ययों के नाम पर आहरित की गई। जानकारी के मुताबिक 16 अप्रैल 2024 को दिनेश कुमार तेकाम के बच्चे के चौक कार्यक्रम के नाम पर जनपद पंचायत के खाते से 75 हजार रुपए का भुगतान सीधे उनके निजी खाते में किया गया। सूत्रों का कहना है कि मात्र तीन वर्षों में ऐसे मदों में लगभग 36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है।
दस्तावेज यह भी दर्शाते हैं कि वर्ष 2023 में लगभग 17 लाख रुपए, वर्ष 2024 में करीब 11.30 लाख रुपए और वर्ष 2025 में लगभग 8 लाख रुपए जनपद पंचायत के खाते से संबंधित कर्मचारी के निजी खाते में भुगतान किए गए। सूत्रों के अनुसार यदि वर्ष 2017–18 से 2025–26 तक किए गए सभी भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि के गबन का खुलासा हो सकता है।
मामले को लेकर जिला पंचायत स्तर पर संज्ञान लिया गया है। जिला पंचायत डिंडौरी के सीईओ दिव्यांशु चौधरी, आईएएस ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
