मध्यप्रदेश के मेहर जिले की जनपद पंचायत मेहर में बीपीएल सूची में अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ने और फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी कर शासकीय योजनाओं का अनुचित लाभ दिलाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
— ये रहा पूरा मामला
दरअसल प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में सामने आया कि पटवारी की सर्वे रिपोर्ट एवं तहसीलदार के सत्यापन के बिना ही अपात्र व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में शामिल कर दिए गए। अब तक की जांच में 111 अपात्र हितग्राहियों को फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी किए जाने की पुष्टि हुई है।
आरोप है कि वर्ष 2018 से वर्तमान तक इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर अपात्र व्यक्तियों ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति हुई। शिकायत के सत्यापन के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों के अनुसार जांच की गई। जांच में पाया गया कि बीपीएल सूची का नियमानुसार संधारण नहीं किया गया और बिना सक्षम स्वीकृति एवं आवश्यक सत्यापन के अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची में जोड़ दिए गए।
इस मामले में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, विकास खंड अधिकारी, बीपीएल प्रभारी सहित कुल 6 अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए) एवं 13(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। वहीं ईओडब्ल्यू ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
