— पुरनिहिया तालाब के समीप निर्माणाधीन पुलिया के स्थल चयन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, जिला पंचायत सीईओ से जांच व कार्य रोकने की मांग
डिंडौरी। जनपद पंचायत समनापुर की ग्राम पंचायत कुकर्रामठ में लगभग 6 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुलिया अब विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल के चयन और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला पंचायत सीईओ को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की है।
वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुरनिहिया तालाब के समीप जिस स्थान पर पुलिया बनाई जा रही है, वहां न तो कोई स्थायी नाला है और न ही ऐसा प्राकृतिक जल निकासी मार्ग, जहां पुलिया निर्माण की वास्तविक आवश्यकता हो। उनका कहना है कि बिना आवश्यकता के सरकारी धन खर्च कर निर्माण कराया जा रहा है।
— निर्माण गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए निर्माण स्थल के फोटो में पुलिया के दोनों ओर पाइपों की फिटिंग असमान दिखाई दे रही है। पाइपों के जोड़ और किनारों पर दरारनुमा स्थिति, उखड़ा हुआ प्लास्टर और फिनिशिंग की कमी भी नजर आती है। निर्माणाधीन ढांचे के आसपास मिट्टी का समुचित भराव और सुरक्षा प्रबंध भी दिखाई नहीं देते। हालांकि इन तकनीकी पहलुओं की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य की स्वीकृति कथित रूप से फर्जी प्रस्ताव और दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त की गई। उनका कहना है कि निर्माण से पहले न तो तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थल का समुचित निरीक्षण किया गया और न ही आवश्यकता का सही आकलन किया गया।
शिकायत में उपसरपंच सीताराम ठाकुर पर भी आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्य नियमों के विपरीत ठेके के माध्यम से कराया जा रहा है तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर कथित फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी राशि निकालने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने निर्माण से जुड़े प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति, मस्टर रोल और भुगतान अभिलेखों की गहन जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक पुलिया निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए, जिससे शासकीय राशि के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सके। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।




