Crime News : शादी का झांसा देकर डेढ़ माह तक दुष्कर्म, शादी की बात पर मारपीट और जान से मारने की धमकी; आरोपी को 5 साल की सजा….

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने और शादी की बात कहने पर मारपीट व जान से खत्म करने की धमकी देने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के कारावास और 2 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

मीडिया सेल प्रभारी अभियोजन अधिकारी दिलावर धुर्वे के अनुसार, मामला थाना मेहंदवानी के अपराध क्रमांक 40/2025 एवं सत्र प्रकरण क्रमांक 27/2025 से संबंधित है। आरोपी शैलेन्द्र प्रजापति (24 वर्ष), निवासी कुम्हार मोहल्ला, थाना मेहंदवानी, जिला डिंडौरी के खिलाफ युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी।

 

डेढ़ माह तक शादी का झांसा देकर करता रहा दुष्कर्म

 

अभियोजन के अनुसार, पीड़िता की आरोपी से मेहंदवानी बाजार में पहचान हुई थी। दोनों के बीच बातचीत होने लगी। आरोपी ने युवती से शादी करने का वादा करते हुए उसे अपने साथ रहने के लिए कहा। 14 जनवरी 2025 को आरोपी शादी का वादा कर युवती को अपने घर ले गया। घर में किसी के नहीं होने पर उसके साथ दुष्कर्म किया।

 

इसके बाद आरोपी ने युवती को अपने घर के पास एक कमरे में रहने दिया। अभियोजन के मुताबिक, युवती करीब डेढ़ माह तक वहां रही और इस दौरान आरोपी ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। जब युवती शादी करने के लिए कहती तो आरोपी बाद में शादी करने की बात कहकर टाल देता था।

 

शादी की बात दोहराने पर मारपीट और धमकी

 

घटना के अनुसार, 2 मार्च 2025 को युवती ने आरोपी से फिर शादी करने के लिए कहा। आरोप है कि इस पर आरोपी ने उसके साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की और दोबारा शादी की बात करने पर जान से खत्म करने की धमकी दी। इसके बाद उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। युवती ने अपनी मां को पूरी घटना बताई और मां के साथ थाना मेहंदवानी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर विवेचना की और साक्ष्यों के आधार पर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

 

न्यायालय ने सुनाई सजा

 

मामले की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, जिला डिंडौरी के न्यायालय में हुई। उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी शैलेन्द्र प्रजापति को धारा 69 बीएनएस के तहत दोषी मानते हुए 5 वर्ष के कारावास एवं 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

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