मध्यप्रदेश के जबलपुर राँझी तहसील के अंतर्गत ग्राम भड़पुरा में स्थित शोभापुर पहाड़ी के स्वरूप में अवैध बदलाव कर कॉलोनी निर्माण करने के मामले में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सख्त कार्रवाई करते हुए कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों पर कुल 4 करोड़ 08 लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है।
यह कार्रवाई बिना अनुमति मिट्टी, मुरम और बोल्डर के उत्खनन कर आवासीय कॉलोनी विकसित करने के आरोप में की गई है। प्रकरण में कॉलोनाइजर अभिलाष तिवारी सहित भूमि स्वामी शोभना सिंह, मुकेश सिंह, महेश सिंह, नरेंद्र सिंह, रागिनी सिंह और रमेश सिंह को दोषी पाया गया है।
कलेक्टर ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में अर्थदंड जमा नहीं करने पर वसूली के लिए आरआरसी जारी की जाएगी और इसके बाद भी भुगतान न होने की स्थिति में तहसीलदार के माध्यम से कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला ग्राम भड़पुरा की करीब 4.24 हेक्टेयर भूमि में से 2.58 हेक्टेयर निजी जमीन पर अवैध उत्खनन और कॉलोनी निर्माण की शिकायत के बाद सामने आया था। तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और खनिज विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जांच के बाद कलेक्टर कोर्ट में प्रकरण दर्ज किया गया।
जांच के दौरान अवैध खनिज भंडारण के लिए पहले ही 50 लाख रुपये का अर्थदंड प्रस्तावित किया गया था, जिसे कलेक्टर कोर्ट ने लागू किया। इस आदेश के खिलाफ कमिश्नर न्यायालय में अपील की गई, लेकिन वहां भी कलेक्टर का फैसला बरकरार रखा गया।
आगे की जांच में यह सामने आया कि कॉलोनाइजर और भूमि स्वामियों ने कॉलोनी विकास के दौरान निकले खनिज का उपयोग बिना रॉयल्टी जमा किए किया, जो मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 का उल्लंघन है। अधिकारियों ने 13,600 घनमीटर खनिज के अवैध उपयोग पर रॉयल्टी, अर्थदंड और पर्यावरण क्षतिपूर्ति मिलाकर 2.04 करोड़ रुपये की वसूली का प्रस्ताव भी दिया था।
गूगल अर्थ बना सबूत
इस पूरे मामले में गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज भी अहम साक्ष्य बनी। वर्ष 2019 से 2025 तक की तस्वीरों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि पहले पहाड़ी स्वरूप वाली भूमि को धीरे-धीरे समतल कर निर्माण कार्य किया गया।प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कॉलोनियों और खनन गतिविधियों में लगे लोगों को कड़ा संदेश गया है।
