Big Breaking : मनरेगा में लाखों की अनियमितताओं पर गिरी गाज, उपयंत्री कमलेश धुमकेती की संविदा सेवा समाप्त….

Rathore Ramshay Mardan
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नाला विस्तार, सीसी रोड और परकुलेशन टैंक निर्माण कार्यों में मिली वित्तीय गड़बड़ियां, जांच के बाद जिला पंचायत ने लिया बड़ा फैसला

 

डिंडौरी। जिले में मनरेगा योजना के अंतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और कार्यों के प्रति लापरवाही के मामलों में जिला पंचायत ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत डिंडौरी में पदस्थ उपयंत्री कमलेश धुमकेती की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।

दरअसल मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा 29 मई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि विभिन्न जांचों में सामने आई अनियमितताओं एवं बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

जारी आदेश के मुताबिक 

जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत पडरियाकला में मनरेगा अंतर्गत नाला विस्तार कार्य में मजदूरों के नाम पर बिना कार्य कराए नियम विरुद्ध तरीके से राशि आहरित किए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में पंचायत राज अधिनियम की धारा 89(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद संबंधित मामले में उपयंत्री पर 2 लाख 23 हजार 388 रुपये की देयता निर्धारित की गई।

 

इसी प्रकार ग्राम पंचायत पौंडी माल में सीसी रोड निर्माण कार्य की जांच में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। जांच में पाया गया कि जिस सड़क की लंबाई 272 मीटर दर्शाई गई थी, वहां वास्तविक निर्माण केवल 218 मीटर ही हुआ था। इसके बावजूद पूर्ण लंबाई का मूल्यांकन कर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। जांच में 54 मीटर सड़क निर्माण कम पाए जाने पर लगभग 1 लाख 98 हजार 529 रुपये की अतिरिक्त मूल्यांकित राशि की वसूली प्रस्तावित की गई है। इस मामले में भी पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा ग्राम पंचायत पौंडी माल और नयागांव क्षेत्र में निर्मित परकुलेशन टैंकों की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ परकुलेशन टैंक शासकीय भूमि के बजाय निजी स्वामित्व वाली भूमि पर निर्मित कराए गए, जो मनरेगा दिशा-निर्देशों के विपरीत है। रिपोर्ट के अनुसार तीन परकुलेशन टैंक निर्माण कार्यों पर लगभग 27.95 लाख रुपये व्यय किए गए थे, जबकि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उपयंत्री से 5 लाख 59 हजार रुपये की वसूली योग्य राशि निर्धारित की गई।

 

जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि इन मामलों को लेकर संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे तथा व्यक्तिगत सुनवाई का भी पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया। इसके अलावा समय-समय पर समीक्षा बैठकों एवं पत्राचार के माध्यम से कार्य में सुधार के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए और न ही कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार देखने को मिला।

आदेश में यह भी कहा गया है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद उपयंत्री द्वारा किए गए कार्य शासन के दिशा-निर्देशों और संविदा सेवा नियमों के प्रतिकूल पाए गए। वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में उदासीनता, लापरवाही तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में असफलता को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा जारी संविदा सेवा शर्तों के तहत उनकी संविदा सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

 

मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू होगी। आदेश की प्रतिलिपि आयुक्त मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल, आयुक्त जबलपुर संभाग, कलेक्टर डिंडौरी, जनपद पंचायत डिंडौरी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है।

 

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