डिंडौरी। जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब 1 अप्रैल से किसानों को खाद केवल ई-विकास प्रणाली के तहत जारी ई-टोकन के माध्यम से ही मिलेगा। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है।
कृषि विभाग के अनुसार ई-टोकन में किसानों को मिलने वाले उर्वरक की मात्रा, वितरण केंद्र, तिथि और समय की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे खाद दुकानों पर भीड़ कम होगी, किसानों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी और वितरण में होने वाली अव्यवस्थाएं भी खत्म होंगी।
उप संचालक कृषि ने बताया कि प्रदेश में ई-विकास प्रणाली 15 जनवरी से लागू की गई थी, जिसे अब 1 अप्रैल से पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को पहले फार्मर आईडी बनवानी होगी, जो पटवारी या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है। पंजीयन के बाद किसानों को ई-विकास पोर्टल से ई-टोकन जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर वे नजदीकी उर्वरक विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेंगे।
कृषि विभाग ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि 1 अप्रैल से 100 प्रतिशत वितरण ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही करें, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी फार्मर आईडी बनवाकर ई-टोकन प्राप्त करें और समय रहते उर्वरक का भंडारण सुनिश्चित करें, ताकि आगामी खेती कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो।





