Dindori Corruption News: सामाजिक अंकेक्षण में खुला मनरेगा घोटाला, रोजगार सहायक से होगी 1.33 लाख की वसूली…..

Rathore Ramshay Mardan
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15 दिनों में 1.33 लाख रुपये जमा करने के आदेश, नहीं तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

डिंडौरी। जनपद पंचायत समनापुर की ग्राम पंचायत मारगांव में मनरेगा योजना के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। हितग्राही मूलक चैकडेम निर्माण कार्य में बिना कोई भौतिक कार्य कराए शासकीय राशि निकाले जाने के मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के बाद ग्राम रोजगार सहायक को दोषी ठहराते हुए उससे 1 लाख 33 हजार 270 रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं।

मनरेगा अंतर्गत बेयान बाई, जमुना बाई और तुलादास मोदी के नाम पर चैकडेम निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए थे। जब सामाजिक अंकेक्षण दल ने निर्माण स्थलों का भौतिक सत्यापन किया, तो कहीं भी कार्य प्रारंभ होना नहीं पाया गया। इसके बावजूद मस्टर रोल जारी कर भुगतान दर्शाया गया, जिससे शासकीय राशि के दुरुपयोग का खुलासा हुआ।

मध्यप्रदेश सामाजिक संपरीक्षा समिति भोपाल के निर्देश और कलेक्टर डिंडौरी के आदेश पर वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 के मनरेगा कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण कराया गया था। अंकेक्षण के उपरांत गठित जनपद स्तरीय समिति की विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने आया कि बिना निर्माण कार्य कराए ही मजदूरी भुगतान दिखाया गया।

जांच में तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक कमलेश धनंजय को इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार पाया गया। उन्होंने अपने यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर नियमों के विपरीत मस्टर रोल जारी किए। सुनवाई के दौरान उन्हें अपने बचाव में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पांच अवसर दिए गए, लेकिन वे कोई भी ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।

प्रारंभिक जांच में सरपंच अमरीश सैयाम एवं तत्कालीन सचिव दुर्गेश बरोतिया को भी समान रूप से जिम्मेदार मानते हुए वसूली प्रस्तावित की गई थी, किंतु सामग्री मद में किसी प्रकार का भुगतान नहीं होने और प्रत्यक्ष संलिप्तता सिद्ध न होने के कारण दोनों को प्रकरण से पृथक कर दिया गया।

पूरे मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 एवं 92 के अंतर्गत की गई। जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी दिव्यांशु चौधरी ने 20 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए ग्राम रोजगार सहायक को 15 दिवस के भीतर 1 लाख 33 हजार 270 रुपये की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय-सीमा में राशि जमा नहीं होने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

यह मामला एक बार फिर मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को रेखांकित करता है। प्रशासन की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि शासकीय योजनाओं में अनियमितता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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